मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > प्रादेशिक
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
मुंडे का भाजपा नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह
भुजबल, राणे के साथ मिलकर बना सकते हैं नया दल
भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह के तेवर को आज और कड़ा करते हुए महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे ने 26 अप्रैल से राज्यव्यापी 'संवाद यात्रा' शुरू करने की घोषणा की।

मुंडे ने भाजपा के मौजूदा नेतृत्व के अलोकतांत्रिक तरीके से काम करने का अपना आरोप सोमवार को दोहराते हुए कहा कि पार्टी के निर्णय सभी सम्बद्ध की सहमति के बगैर किचन कैबिनेट द्वारा लिए जाते हैं।

मुंडे ने राज्य विधानसभा के चालू बजट सत्र की कार्यवाही के बीच यह भी दावा किया कि प्रदेश में पार्टी के 34 जिला अध्यक्ष उनके साथ हैं। उनका कहना था कि उन्होंने भाजपा के सभी पदों से अपना इस्तीफा कल ही पार्टी आलाकमान को भेज दिया है और उनका तत्काल दिल्ली जाने का इरादा नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कोई क्षेत्रीय पार्टी बनाने अथवा अन्य दल में शामिल होने का इरादा नहीं है, वे भाजपा के आम कार्यकर्ता के रूप में बने रहेंगे। इससे पूर्व आज ही भाजपा विधानमंडल बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर मुंडे से पार्टी के सभी पदों से दिए उनके इस्तीफे को वापस लेने का आग्रह किया गया।

भाजपा विधानमंडल दल के नेता एकनाथ खडसे ने बताया कि प्रस्ताव में मुंडे को पार्टी नेता बताते हुए यह विश्वास व्यक्त किया गया है कि उनके नेतृत्व में पार्टी राज्य में आगे बढ़ती रहेगी।

छगन भुजबल से मिले : जानकार सूत्रों के अनुसार मुंडे ने विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता एवं राज्य के लोकनिर्माण मंत्री छगन भुजबल से भी बातचीत की, जो उन्हीं की तरह अन्य पिछड़े वर्ग के दमदार पर अपने दल में असंतुष्ट नेता हैं।

इस बीच राजनीतिक हल्कों में कयास लग रहे हैं कि मुंडे और भुजबल आगामी आम चुनाव के पहले राज्य में कोई नया राजनीतिक मोर्चा खड़ा कर उसमें राज्य के राजस्व मंत्री एवं असंसतुष्ट कांग्रेस नेता नारायण राणे समेत विभिन्न दलों के अन्य असंतुष्ट नेताओं को भी साथ लाने का प्रयास कर सकते हैं। राणे राज्य के मुख्यमंत्री और भुजबल उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और दोनों ही पहले शिवसेना में थे।

मुंडे ने भुजबल से उनके मंत्री कक्ष में बातचीत करने के बाद विधान भवन परिसर में ही विधानसभा तथा विधान परिषद में भाजपा गुट के नेता क्रमशः एकनाथ खडसे तथा पांडुरंग फुंडकर से भी एक साथ करीब 20 मिनट बात की थी।

इस बीच कयास लग रहे थे कि मुंडे ने विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देने का निश्चय कर लिया है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि खडसे और फुंडकर ने उन्हें विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने से फिलहाल रोक लिया और साथ ही यह पेशकश रखी कि वे दोनों भाजपा आलाकमान के सम्मुख उनका पक्ष रखने के लिए दिल्ली जा सकते हैं। इस पर मुंडे राजी हो गए।

विधानसभा में विपक्ष एवं शिवसेना के नेता रामदास कदम ने भी इस बात की पुष्टि की है कि मुंडे ने सदन की सदस्यता छोड़ने का मन बना लिया था पर उन्हें समझा-बुझाकर ऐसा करने से रोक दिया गया। शिवसेना भाजपा का सहयोगी दल है और राज्य में करीब दो दशक से उनका गठबंधन है।

इस बीच भाजपा आलाकमान के बुलावे पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन गडकरी और पूर्व केन्द्रीय मंत्री राम नाईक के यहाँ से रवाना होने के कुछ घंटे बाद खडसे और फुंडकर भी दिल्ली चले गए हैं। पर मुंडे ने इस बुलावे को नकार दिया है।

बुलावे के बारे में पूछे जाने पर मुंडे ने कहा- मैं दिल्ली नहीं जा रहा। मुझे यहाँ राज्य विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र की कार्यवाही में भाग लेना है।

मुंडे ने महाराष्ट्र में भाजपा के कामकाज को लेकर पार्टी नेतृत्व से अपने मतभेद के कारण दल के राष्ट्रीय महासचिव के साथ ही पार्टी की राष्ट्रीय चुनाव समिति के सदस्य पद से भी इस्तीफा दे देने की कल औरंगाबाद में घोषणा की थी और उसी के बाद पार्टी आलाकमान ने यह बुलावा भेजा। इस बीच, मुंडे के भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा देने के मामले की गूँज विधानसभा और फिर विधान परिषद में भी उठी।

मुंडे के कल औरंगाबाद में इस बयान का उल्लेख करते हुए कि उन्हें पिछले दो वर्ष से सदन में नहीं बोलने दिया जा रहा है, राकांपा के नवाब मलिक ने विधानसभा में व्यवस्था का प्रश्न उठाया और कहा कि यह विधानसभा अध्यक्ष पर सीधा दोषारोपण है। इस पर सदन में शोरगुल मच गया।

विधानसभा अध्यक्ष को शोरगुल के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। शोरगुल तभी खत्म हुआ जब मुंडे ने खुद सदन में आकर कहा कि उनके औरंगाबाद में दिए बयान का सदन से कोई संबंध नहीं है और यह बयान उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है।

राकांपा के ही गुरुनाथ कुलकर्णी ने विधान परिषद में यह मामला उठाकर इस पर चर्चा कराने की माँग की। कांग्रेस के संजय दत्त ने इस माँग का समर्थन किया।

मुंडे दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन के बहनोई हैं और उनके विद्रोह के समर्थन में राज्य के विभिन्न जिलों की भाजपा इकाई के नेताओं के पार्टी पदों से इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है।
और भी
जबरन वसूली के मामले में गवली गिरफ्तार
अभिषेक-ऐश ने मियामी में मनाई सालगिरह
गोपीनाथ मुंडे ने इस्तीफा दिया
टैगोर के पदक की बीमा राशि मिलना बाकी
राहुल ने सिखाये बाक्सिंग के गुर
पूर्व सांसद दत्ता मेघे ने राकांपा छोड़ी