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टैगोर के पदक की बीमा राशि मिलना बाकी
रवींद्रनाथ टैगोर को मिले नोबल पदक के चोरी होने के मामले को सीबीआई की ओर से बंद करने के छह महीने के बाद भी विश्व भारती विश्वविद्यालय को 2.39 करोड़ रुपए की बीमा राशि मिलना बाकी है।

अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक कृति गीतांजली के लिए टैगोर को वर्ष 1913 में नोबेल पदक मिला था, जो 25 मार्च 2005 को विश्व भारती विश्वविद्यालय के रविंद्र भवन संग्रहालय से चोरी हो गया।

इसी के साथ टैगोर की सोने की घड़ी, आभूषण और हाथीदाँत से बनी शिल्पकारी की वस्तुएँ भी चोरी हो गईं थीं।

नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से इन वस्तुओं का बीमा करा चुके संग्रहालय के अधिकारियों ने कंपनी की सूरी शाखा पर इसी वर्ष 30 मार्च को 2.39 करोड़ रुपए का दावा किया।

विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारी ने कहा तीन साल तक चले मामले में सफलता नहीं मिलने के कारण सीबीआई मामले को बंद कर चुकी है। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने दावे के एवज में राशि नहीं दी है।

अधिकारी ने कहा दावे के लिए भुगतान करने को लेकर हमने कई बार बीमा कंपनी को लिखा है लेकिन उन्होंने पत्रों को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने लिखित में यह भी नहीं दिया कि वे कितनी राशि का भुगतान करेंगे।
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