मुम्बई पुलिस एक व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी किडनी निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को प्रत्यारोपित करने के मामले में आरोपी डॉक्टरों की भूमिका की छानबीन कर रही हैं।
डॉक्टर सेंट्रल मुम्बई के एक ख्यातिप्राप्त अस्पताल से संबंधित हैं और उन पर 2001 में एक दिहाड़ी मजदूर की किडनी निकालने का आरोप है।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) देवेन भारती ने बताया कि अब तक किसी भी डॉक्टर को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया है। इस मामले में छानबीन चल रही है और हमलोग उचित समय आने पर खुलासा करेंगे।
दीपक सूर्यवंशी ने 2001 में अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि वह रक्तदान करने के लिए अस्पताल गया था, लेकिन उसकी सहमति के बिना ही किडनी निकाल ली गई।
बाद में सूर्यवंशी की किडनी राजस्थान के दीपक ठाकुर को प्रत्यारोपित कर दी गईं। इस प्रकरण में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले अशोक देसाई नाम के एक व्यापारी को पुलिस ने 13 अप्रैल को गिरफ्तार किया था।
देसाई पर सूर्यवंशी को दीपक ठाकुर का रिश्तेदार बताकर किडनी प्रत्यारोपित कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप है।
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