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भारत भवन में 'महाभारत'
साहित्य, संस्कृति, कला और संगीत को समर्पित 'भारत भवन' इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। एक तरफ भारत भवन न्यास के पुनर्गठन की सुगबुगाहट है तो दूसरी ओर संस्‍था के पदाधिकारियों के बीच शह और मात का खेल चल रहा है।

भारत भवन के अध्यक्ष दयाप्रकाश सिन्हा ने कुछ समय पूर्व मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव राकेश साहनी को लिखे पत्र में आरोप लगाए हैं कि पूर्व न्यासी सचिव रामेश्वर मिश्र पंकज भारत भवन में अपना एकछ‍त्र आधिपत्य जमाना चाहते थे और अब वर्तमान न्यासी सचिव मनोज श्रीवास्तव भी उन्हीं के कदमों पर चल रहे हैं। पिछले 11 महीनों से कार्यकारिणी और न्यास मंडल की एक भी बैठक नहीं होने दी गई है।

बैठक नहीं होने के कारण कार्यकारिणी समिति और न्यास मंडल द्वारा न तो 2007-08 का बजट स्वीकृत किया गया है और न ही किसी कार्यक्रम अथवा व्यय पर पूर्व स्वीकृति प्राप्त हुई है। ऐसे में कर्मचारियों को जो वेतन दिया जा रहा है, वह भी अवैध है। साथ ही पिछले 11 माह में भारत भवन कोष से जो भी व्यय हुआ है, वह पूरी तरह अवैध है। यदि कोष का मनमर्जी से इस्तेमाल किया जाता है तो यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

सिन्हा ने मुख्य सचिव को भेजे अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अध्यक्ष को बदनाम करने की नीयत से मनोज श्रीवास्तव ने अध्यक्ष के विरुद्ध फर्जी जाँच करके प्रचारित किया कि सिन्हा दोषी पाए गए हैं।

भारत भवन अध्यक्ष के मुताबिक जिसके विरुद्ध जाँच की जाती है, नियमानुसार उसको बताया जाता है कि संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध क्या आरोप हैं और उसको अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया जाता है, लेकिन श्रीवास्तव ने न तो अध्यक्ष को यह बताया कि उनके विरुद्ध क्या आरोप हैं और न ही उनका पक्ष जाना। सिर्फ एकतरफा जाँच के आधार पर उन्हें दोषी करार दे दिया।

सिन्हा के मुताबिक भारत भवन पर कब्जा बनाए रखने के लिए शासन न्यासी सचिव के माध्यम से न्यास को भंग करने का विचार रहा है। यदि ऐसा होता है तो लोगों में यह संदेश जाएगा कि भाजपा सरकार कला-संस्कृति के क्षेत्र में काम करना नहीं जानती। साथ ही कलाकारों, साहित्यकारों और रंगकर्मियों का न तो वह सम्मान करती है और न ही उनकी स्वायत्तता का सम्मान करती है।

श्रीवास्तव का टिप्पणी से इनकार : भारत भवन के वर्तमान न्यासी सचिव ने इस मामले में किसी भी तरह की टिप्पणी से बचते हुए फोन पर बताया कि दयाप्रकाश सिन्हा के आरोपों पर सार्वजनिक रूप से बोलना वे उचित नहीं समझते।

न्यास के पुनर्गठन की तैयारी : इस बीच, भारत भवन न्यास के पुनर्गठन की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है। न्यासी अध्यक्ष के लिए संस्कृति चिंतक और नर्मदा पदयात्री अमृतलाल बेगड़ (जबलपुर) के नाम पर सहमति बन सकती है।‍ अविवादित होने के कारण बेगड़ के नाम पर सर्वसम्मति के पूरे आसार बन रहे हैं। डॉ. प्रभाकर श्रोत्रीय, मालती जोशी, संगीतज्ञ गोकुलोत्सव महाराज, डॉ. रमेशचंद्र शाह आदि को भी न्यास में शामिल किया जा सकता है। पूर्व न्यासी सचिव रामेश्वर मिश्र पंकज को भी पुन: शामिल किए जाने की प्रबल संभावनाएँ हैं।
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