डीएनए परीक्षण होने के बाद भी चार माह की खुशी के माता-पिता ने उसको अपनाने से इनकार कर दिया और उसको सिओन अस्पताल में ही छोड़ दिया। अपनी नन्हीं बच्ची को देखकर भी इन माता-पिता का दिल नहीं पसीजा। खुशी का कसूर इतना है कि वह एक लड़की है।
दरअसल चार माह पहले दिसंबर में इस दंपति ने सिओन अस्पताल अधिकारियों पर उनके नवजात बेटे को एक बालिका से बदलने का आरोप लगाया था। दोनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और बच्ची को अपनाने से इनकार कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद बच्ची और उसकी माँ का डीएनए परीक्षण किया गया, जिसमें साबित हुआ कि शीला ही खुशी की माँ है। चार माह की खुशी के पिता राजमणि और माता शीला जैसवाल ने आज शाम एक निजी टीवी चैनल को एक घंटा लंबा साक्षात्कार दिया। साक्षात्कार के बाद शाहू नगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महादेव गुंदेवाड़ी ने को बताया कि अब तक गायब इन माता-पिता के खिलाफ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अब जबकि वे एक साक्षात्कार दे चुके हैं उनको जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।
जब माता-पिता को डीएनए परीक्षण के बारे में जानकारी दी गई थी, तो उन्होंने अस्पताल को लिखकर दिया था कि वे अपने बच्ची को नहीं ले रहे हैं और उन्होंने अस्पताल छोड़ दिया। यह दंपति मध्य मुंबई के धारावी झुग्गी क्षेत्र में रहता है। खुशी को यह नाम अस्पताल की नर्सों ने दिया है और अस्पताल के बालरोग विभाग में उसे रखा गया है।
|