चैरिटी वेब ऑर्ट गैलरी के लिए विश्व की सबसे बड़ी गजल का रिकॉर्ड बनाने वाले राजकुमार चंदन के नेतृत्व में 20 कलाकारों की टीम द्वारा पिछली 7 अप्रैल से बनाई जा रही विश्व की सबसे बड़ी जल रंगोली का काम 15 अप्रैल को पूर्ण होना था, लेकिन तेज हवा से उठ रही लहरों ने 90 हजार स्क्वेयर फुट तक बन चुकी रंगोली को मटियामेट कर दिया।
चंदन ने बताया कि सवेरे सात बजे से काम शुरू करने के बाद रात 10 बजे हम घर जाते हैं, लेकिन तीन दिन पूर्व जब रात में तेज आँधी चली तो मैं और मेरे साथी कलाकारों के दिल थम से गए। सवेरे जब हमने देखा तो लगभग 90 हजार स्क्वेयर वर्गफुट के कार्य को लहरों ने तहस-नहस कर दिया था। निश्चित ही यह हौसला पस्त करने वाला वाकया था। मुझसे ज्यादा मेरे साथियों को इस बात से ज्यादा दु:ख हुआ। उसी दिन हम सभी ने मीटिंग की और रंगोली बनाने की रणनीति चेंज कर दी। निश्चित ही 15 के बजाय अब 22 के आसपास उस टारगेट को अचीव करेंगे, लेकिन अब हमें इन लहरों से लड़ना है।
चंदन ने कहा कि आमतौर पर रंगोली बनाने की शुरुआत बीच से की जाती है, फिर धीरे-धीरे उसका बाहर विस्तार होता है, लेकिन अब हमने लहरों तथा अन्य खतरों को देखते हुए रणनीति बदल दी है। अब रंगोली बनाने की शुरुआत किनारे और उस जगह से की जा रही है, जहाँ लहरों का प्रकोप ज्यादा न हो।
चंदन ने कहा कि लहरों के अलावा रंगोली को खतरा पानी की उन मछलियों से भी है जो फ्लावर के भीतर भरे गए रंगों के इर्द-गिर्द और बीच में विचरण कर चली जाती हैं, जिससे रंग फैल जाते हैं। पक्षी भी रंगोली के बेस के ऊपर बैठकर पूरे फ्लावर को हिलाने की ताकत रखते हैं। किनारे-किनारे तैरने वाली भैंसों को भी रोकने की जुगत नाकाम होती जा रही है।
चंदन और उनकी टीम का संघर्ष : घंटों पानी में रहकर काम करने की वजह से चंदन के पैरों में स्कीन प्रॉब्लम होने लगी है। तेज धूप और हवा की तहस-नहस प्रवृत्ति के चलते सभी के हौसले हिल से गए थे, लेकिन उन्होंने फिर से स्वयं को मजबूत कर लिया। अब तक चंदन और उनकी टीम ने तीन साँपों का सामना किया है, लेकिन फिर भी सभी साथी पानी में डटे हुए हैं।
चंदन ने आशा व्यक्त की कि लहरों और खतरों से लड़कर हमारी 'रंगोली' धीरे-धीरे विराट रूप धारण करेगी और निश्चित ही मैं और मेरी टीम इस नामुमकिन से लगने वाले काम को अंजाम तक पहुँचाने का कार्य करेंगे।
कहते हैं- लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती। कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
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