बच्चों की मासिक पत्रिका 'चंदामामा' के बारे में हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन का कहना है कि यह पत्रिका मेरे बचपन की साथी रही है।
गुरुवार रात पत्रिका के 60 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष संस्करण के लोकार्पण के मौके पर उन्होंने कहा कि बचपन में मैं पश्चिमी कॉमिक्स से प्रभावित था। जब मेरे माता-पिता ने मुझे 'चंदामामा' पढ़ाई तो उसके बाद से मेरा और इसका साथ नहीं छूटा। मैं सोचता हूँ कि भारत में ऐसा कोई घर नहीं है, जहाँ बच्चों के बीच चंदामामा लोकप्रिय नहीं है।
बिग बी ने कहा कि जाहिर है कि अब मुझे चंदामामा पढ़ने का समय नहीं मिलता, लेकिन मैं अपने नातियों को जरूर ये पढ़ाऊँगा। पत्रिका समूह का इंटरनेट और रेडियो के जरिये बच्चों तक पहुँचना भी प्रशंसनीय है।
इस अवसर पर चंदामामा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एल. सुब्रमण्यम ने कहा कि इस आयोजन में अमिताभ को इसलिए बुलाया गया, क्योंकि उन्होंने भी चंदामामा की तरह 60 वर्ष की उम्र के बाद खुद को फिर से तैयार किया है। उन्होंने कहा कि आजकल तो बच्चे छपी हुई पत्रिका के अलावा काफी कुछ सामग्री मोबाइल, रेडियो, इंटरनेट और टीवी से लेते हैं।
सुब्रमण्यम ने कहा कि उन्होंने मोबाइल, रेडियो, इंटरनेट, सीडी और डीवीडी पर भी चंदामामा की शुरुआत की है। टीवी धारावाहिकों और फिल्मों के अलावा एनिमेशन के लिए कुछ स्टूडियो से बात की जा रही है। उन्होंने बताया कि हमारे पुस्तकालय में 12 हजार कहानियों और 25 पात्रों का सबसे बड़ा संग्रह है।
चंदामामा के संपादक बी. विश्वनाथ रेड्डी ने कहा कि उनके पिता नागी रेड्डी ने 1947 में पत्रिका की शुरुआत की थी। 196 पन्नों के विशेष संस्करण में इसके प्रारंभिक संस्करणों की कहानियों को भी लिया गया है।
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