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भये प्रकट कृपाला...
प्रेम भूषण ने जमकर ठुमके लगाए
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परम पावन भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में दोपहर 12 बजते ही सभी मंदिरों में भये प्रकट कृपाला... की गूँज सुनाई देने लगती है। इस मंगलमय गान के साथ ही सभी श्रद्धालु अपने को अयोध्या में पाकर रोमांचित हो जाते हैं।

रामनवमी के एक दिन पहले से ही श्रद्धलुओं का अयोध्या में ताँता लग जाता है। प्रातः सरयू तट पर पावन स्नान के बाद भक्तगण जन्मभूमि आदि का दर्शन कर 12 बजे से पहले कनक भवन पहुँचना चाहते हैं। राम जन्मोत्सव का मुख्य कार्यक्रम कनक भवन मंदिर में होता है।

राम जन्म से पूर्व मंदिरों के गृहगर्भ के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। 12 बजे भगवान के प्रकट होते ही अयोध्या झूमने लगती है। मंदिरों के विग्रहों की आरती होने लगती है। कनक भवन में 21 बन्दूकों की सलामी दी जाती है।

जानकी महल ट्रस्ट में विख्यात मानस वक्ता एवं रामकथा के सरस गायक प्रेमभूषण की मौजूदगी में जन्मोत्सव मना। सारा हाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा था। सोहर, बधाइयों व चैती गाई जा रही थी। आज अवध में जन्मे हैं ललना... और लिहले जन्म रघुरइया हो रामा... जैसे गीतों के बोल पर सब लोग थिरकने लगते हैं।

प्रेमभूषण तो इतने भाव-विभोर हो गए कि गले में पड़ी रामनामी से सिर को ढँककर ठुमके लगाने लगे। फिर क्या था श्रद्धालुओं में मानो ऊर्जा का संचार हो गया। स्त्री-पुरूष सभी खुद को भूलकर राममय हो गए। टॉफी, खिलौने, मिठाइयाँ, नकदी, सूखे मेवे बाँटे जाने लगे। नगाड़ों की गूँज बढ़ने लगी। सभी मग्न हो गए और आस्था के सागर में गोते लगाने लगे। एक क्षण को लगा कि समय मानो थम-सा गया हो।

श्रीराम जन्म के बाद प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन सभी मंदिरों में हुआ। श्रद्धालुओं ने अयोध्या के अन्य मंदिरों की परिक्रमा शुरू कर दी। अयोध्या में तीन हजार से ज्यादा मंदिर हैं।

रामनवमी को हनुमान गढ़ी में विशेष भीड़ रही। अयोध्या नगर में मेले-सा दृश्य था। लोग बाजारों में खरीदारी कर रहे थे तो अनेक लोग अपने बच्चों का मुंडन करा रहे थे। सभी श्रद्धालुओं के चेहरों पर अजब से संतोष का भाव झलक रहा था मानो श्रीराम की नगरी में उनका जन्मोत्सव मनाकर उनका जीवन धन्य हो गया।

प्रेमभूषणजी ने सुन्दरकांड से राम राज्याभिषेक की कथा सुनाई और सरस भजनों से श्रोताओं की झूमने पर पर मजबूर कर दिया।
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