पुरुलिया जिले के 43 किलोमीटर दूर स्थित उस रेलवे स्टेशन को रेल मंत्रालय दोबारा खोलने की योजना बना रहा है जिसके बारे में कई भुतहा कहानियाँ प्रचलित हैं। इस स्टेशन पर आखिरी बार 1972 में रेलगाड़ी चली थी।
स्थानीय लोग इस रेलवे स्टेशन को भुतहा मानते हैं और अँधेरा होने के बाद यहाँ आने से बचते हैं। उनका कहना है कि स्टेशन पर रेलगाड़ी ने एक महिला को कुचल दिया था, जिसके बाद से उसकी आत्मा यहाँ पर भटकती है।
वरिष्ठ संभागीय व्यावसायिक प्रबंधक काली शंकर मुखर्जी कहते हैं कि ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिसमें भारतीय रेलवे ने किसी स्टेशन को मात्र इसलिए बंद कर दिया क्योंकि वहाँ पर आत्माएँ रहती हैं।
मुखर्जी के अनुसार हो सकता है कि स्टेशन के कर्मचारियों को यह स्थान पसंद न हो और स्थानांतरण करवाने के लिए उन्होंने ही भुतहा कहानियाँ फैला दी हों।
एक स्थानीय निवासी निलाधज ने बताया कि यहाँ पर रेलवे के एक कर्मचारी ने भूत को देखा था जिसके कुछ दिन बाद रहस्यमय परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद स्टेशन मास्टर यहाँ से भाग गया था।
सांसद और संसद की रेलवे संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष बासुदेव आचार्य का कहना है कि सँकरे गेज ट्रेक के कारण स्टेशन को बंद किया गया था। पूरे दिन में यहाँ के केवल एक गाड़ी ही जाती थी इसलिए अधिकारियों को इसे बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्टेशन को दोबारा प्रारंभ करवाने के लिए हम पूरे प्रयास कर रहे हैं। राँची संभाग के एक अधिकारी ने स्टेशन को दोबारा प्रारंभ करने के रेलवे मंत्रालय के प्रयासों की पुष्टि करते हुए कहा है कि सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है।
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