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कृषि के पारंपरिक तरीके अपनाएँ-गोविंदाचार्य
भाजपा के पूर्व महासचिव और राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के समन्वयक केएन गोविंदाचार्य ने यह सुझाव दिया है कि मुद्रास्फीति और मूल्यवृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए कृषि के पारंपरिक तरीकों की ओर जाना चाहिए।

उपभोक्तावाद के आलोचक गोविंदाचार्य ने कल यहाँ संवाददाताओं से कहा कि कृषि उपज के संगहण की सुविधा को सुधारने और जरूरतमंद तथा गरीब लोगों में अनाज के व्यवस्थित वितरण करने से देश में भुखमरी की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

गोविंदाचार्य भारत पर वैश्वीकरण के पड़ते प्रभाव के अध्ययन के लिए वर्ष 2003 से सक्रिय राजनीति से दूर हैं। उन्होंने कहा किसानों को शामिल कर एक नया मूल्य आयोग बनाने की जरूरत है जो उद्योगों पर उनके उत्पादों की बाजार कीमत प्रकाशित करने का दबाव डाल सके।

यह अमीर और गरीबी के बीच की दूरी को पाटने का सबसे सही समाधान है। स्थानीय सरकारों को स्वायत्ता देने की पैरवी करने वाले गोविंदाचार्य ने सुझाव दिया कि जमीन से जुड़े लोगों को भी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया जाना चाहिए।

उनके अनुसार स्थानीय सरकार के प्रतिनिधियों को राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में भी अपनी बात रखने का अधिकार दिया जाना चाहिए।
खुद को आरएसएस की विचारधारा का अनुयायी बताने वाले भाजपा के पूर्व नेता गोविंदाचार्य ने विवादास्पद सेतु समुद्रम मुद्दे पर एक सवाल पूछे जाने पर कहा कि यह एक बेजान परियोजना है।

उन्होंने कहा यह पर्यावरण के लिए नुकसानदेह और देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली होगी। परियोजना से हिंदुओं की भावनाओं को भी ठेस पहुँचेगी। गोविंदाचार्य ने राजग की अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली पूर्व केंद्र सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि उसने तब सेतु समुद्रम परियोजना को रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

वे कहते है कि परियोजना के लिए सिर्फ वर्तमान संप्रग सरकार या उसकी सहयोगी माकपा को दोषी नहीं ठहाराया जा सकता। राजग सरकार भी समान रूप से जिम्मेदार है।
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