बिहार की राजधानी पटना के सिनेप्रेमियों को सात दिनों तक देश-विदेश की चुनिंदा फिल्मों के आनंद से सराबोर करने के बाद पटना फिल्म महोत्सव कल संपन्न हो गया।
इस फिल्म महोत्सव में देश-विदेश की 23 चुनिंदा फिल्में दिखाई गई। सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग द्वारा पिछले तीन वर्ष से पटना फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
इस फिल्म महोत्सव में जानेमाने निर्माता प्रकाश झा, फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट पुणे के पूर्व निदेशक त्रिपुरारी शरण और नवोदित अभिनेता अनुराग सिन्हा ने भी शिरकत की।
इस फिल्मोत्सव में हिन्दी फिल्मों के अलावा भोजपुरी, तेलगु, रूसी, जापानी, अमेरिकी एवं स्वीडन भाषा की फिल्में दिखाई गईं। फिल्मोत्सव का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने किया।
मोदी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में फिल्मों के विकास के लिए कृतसंकल्प है। राज्य सरकार युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण ले रहे राज्य के छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करेगी। पटना फिल्मोत्सव में डंगमर बर्गमैन निर्देशित 'द वर्जिन स्प्रिंग' भी दिखाई गई। चौदहवीं सदी के स्वीडन की लोककथा पर आधारित इस फिल्म के माध्यम से स्वीडन के कई सौदर्यात्मक पहलुओं को उजागर किया गया है। वर्ष 1960 में प्रदर्शित इस फिल्म को सिनेमा निर्माण की दुनिया का टेक्सट बुक कहा जाता है।
महोत्सव के चौथे दिन शाहिद कपूर और करीना कपूर की फिल्म 'जब वी मेट' दिखाई गई। फिल्म के प्रति युवाओं में जर्बदस्त रूझान देखने को मिला। इसी दिन भोजपुरी फिल्म 'घूंघटा उठाइले' का भी प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म को पूर्व में निर्धारित कन्नड़ फिल्म 'घाट श्राद्ध' के स्थान पर दिखाया गया।
फिल्म 'घाट श्राद्ध' का प्रिंट उपलब्ध नहीं रहने के कारण भोजपुरी फिल्म 'घूंघटा उठाइले' का प्रर्दशन किया गया। इसी दिन सईद मिर्जा की बहुचर्चित फिल्म 'मोहन जोशी हाजिर हो' का भी प्रर्दशन किया गया। मुंबई की मकान समस्या को ध्यान में रखकर बनाई गई इस फिल्म में यह दिखाया जाता है कि कैसे एक किराएदार मकान का किराया समय पर देने के बावजूद मकान मालिक द्वारा परेशान किया जाता है।
इसके अलावा इसी दिन जापानी फिल्म 'रैशमैन' भी महोत्सव के दौरान दिखाई गई। वर्ष 1951 में प्रदर्शित इस फिल्म ने वेनिस फिल्म फेस्टिबल में ग्रेंड पुरस्कार जीतकर जापानी सिनेमा के दरवाजे पश्चिम की ओर खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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