उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा सर्वसम्मति से ओबीसी को केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के सम्बंध में दिए गए ऐतिहासिक फैसले की सराहना की है, जिसमें ओबीसी के छात्रों को केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए 27 फीसदी आरक्षण देने वाले कानून को बरकरार रखा गया है।
उन्होंने कहा है कि इस निर्णय से उत्तरप्रदेश सरकार पूरी तरह सहमत है और इसका स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी छात्रों को दाखिले में आरक्षण दिए जाने की वैधानिकता की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में आज उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के अनुरूप दाखिलों में आरक्षण व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा मैं भारत सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध करूँगी कि पिछड़ा वर्ग, धार्मिक अल्पसंख्यक तथा अपर कास्ट के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को भी उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए आरक्षण की सुविधा देने के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहाँ तक ओबीसी में क्रीमीलेयर को आरक्षण से वंचित रखने का सवाल है, केन्द्र सरकार को चाहिए कि आज की आसमान छूती महँगाई को देखते हुए क्रीमीलेयर की परिभाषा को फिर से तय करे, जिसमें कहीं ऐसा न हो कि वास्तविक रूप से सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े ओबीसी के बच्चे क्रीमीलेयर की आड़ में आरक्षण से वंचित रह जाएँ।
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