देश के वाणिज्यिक महानगर मुम्बई में हर वर्ष कुल मिलाकर सिर्फ 50 हजार नए आवास बन रहे हैं, जबकि सालाना माँग पाँच लाख की दर से बढ़ रही है और इसलिए सरकार के तमाम दावों के बावजूद यहाँ मकान की कीमत में कमी आने की कोई संभावना नहीं है।
महाराष्ट्र चैम्बर ऑफ हाउसिंग इंडस्ट्री (एमसीएचआई) द्वारा यहाँ बांद्रा-कुर्ला संकुल में 17 से 20 अप्रैल तक आयोजित की जा रही प्रदर्शनी 'प्रॉपर्टी 2008' के बारे में जानकारी देने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्था के विभिन्न पदाधिकारियों के बीच इस बात पर आम सहमति थी।
पिछले नौ वर्षों से लगाई जा रही इस द्विवार्षिक प्रदर्शनी में इस बार देश ही नहीं विदेशों के भी कुल मिलाकर एक सौ से अधिक रियल स्टेट डेवलपर भाग ले रहे हैं और इसमें आने वाले लोगों की तादाद भी एक लाख से अधिक पहुँचने की संभावना है।
एमसीएचआई के मानद सचिव धर्मेश जैन ने कहा कि राज्य सरकार ने आवास निर्माण को बढ़ावा देने के लिए शहरी भूमि हदबन्दी कानून समाप्त करने के अलावा मुम्बई के उपनगरों में फ्लोर स्पेश इंडेक्स में वृद्धि की है, पर तीन तरफ से समुद्र से घिरे इस महानगर में जमीन ढूँढ़ निकालना आसान नहीं है।
संस्था के नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रवीण दोषी, उपाध्यक्ष सुनील मंत्री और संयुक्त सचिव दीपक गोराड़िया ने भी कहा कि दिल्ली के मुकाबले मुम्बई में आवास की समस्या कहीं ज्यादा जटिल है। उनका कहना था कि दिल्ली में गुजर-बसर करने वालों के लिए आवास का निर्माण पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किया जा रहा है पर मुम्बई के आसपास के क्षेत्रों में आवास निर्माण बढ़ाने में सड़क, रेल सम्पर्क आदि बुनियादी ढाँचा की कमी आड़े आ रही है।
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