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नाटकों से वन अधिकारों का प्रचार
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति व अन्य परंपरागत वन निवासी, वन अधिकारों की मान्यता, अधिनियम 2006 एवं नियम 2008 में जनजातियों को दिए गए अधिकारों का प्रचार-प्रसार नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से किया जाएगा।

इसके लिए 13 नुक्कड़ नाटकों के दल प्रदेश के 15 जिलों के आदिवासी बहुल विकासखंडों के लिए रवाना हो गए हैं। यह दल नाटक के माध्यम से जनजातियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे।

साथ ही यह भी बताने का प्रयास करेंगे कि वे राज्य शासन द्वारा वन अधिकार संरक्षण अधिनियम में दी गई सुविधाओं का लाभ कैसे उठा सकते हैं।

आदिम जाति कल्याण विभाग के उपक्रम वन्या के प्रबंध संचालक श्रीराम तिवारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि वन अधिकार अधिनियम में जनजातियों को दिए गए अधिकारों को उन तक पहुँचाने के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

तिवारी ने बताया कि यह दल धार, मंडला, रतलाम, श्योपुर, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, होशंगाबाद, सिवनी, डिंडोरी, बालाघाट, शहडोल, उमरिया और सीधी आदि जिलों में आदिवासी बहुल ब्लाक के गाँवों में नाटकों का प्रदर्शन कर जनजातियों में जागरूकता लाने का काम करेंगे।

तिवारी ने बताया कि नाटक दलों को वन अधिकार अधिनियम की मूल पुस्तिका एवं उसका भीली, गोंडी, कोरकू भाषा में किए गए अनुवाद वाली पुस्तिका एवं दावा फार्म दिए गए हैं। इन पुस्तिकाओं का वितरण नाट्य दलों द्वारा गाँव में जनता के बीच किया जाएगा।
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