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यूपी में भी फैला है सिमी का जाल
कानपुर टेस्ट के मद्‍देनजर कड़ी सतर्कता
WDWD
प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) की गतिविधियाँ कानपुर में बढ़ने से खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। आशंका व्यक्त की जा रही है कि आतंकवादी देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित करने के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच ग्रीनपार्क कानपुर में होने वाले टेस्ट मैच में गड़बड़ी फैला सकते हैं। यह टेस्ट मैच कानपुर में 11 अप्रैल से शुरू हो रहा है। दोनों क्रिकेट टीमें कानपुर पहुँच चुकी हैं।

इस बात को ध्यान में रखकर कानपुर जैसे संवेदनशील शहर में खुफिया एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली है कि कानपुर में पिछले दिनों सिमी के लगभग दो दर्जन लोगों ने गोरा कब्रिस्तान में एक बैठक की, जिसमें करीब दो दर्जन सिमी के सदस्यों ने हिस्सा लिया था। खुफिया एजेंसियों के प्रमुख इस बात का पता लगाने के लिए माथापच्ची कर रहे हैं कि आखिर इन्दौर में पकड़े गए सफदर नागौरी सहित कई बड़े नेताओ की गिरफ्तारी के बाद इस बैठक का एजेंडा क्या था।

सूचना प्राप्त करने के लिए आतंकवाद निरोधक दस्ते को भी सतर्क कर दिया गया है। वेबदुनिया संवाददाता को जानकारों ने बताया कि पिछले दिनों हिन्दुओं का विक्रम संवत नववर्ष भी प्रारंभ हुआ है, इसके चलते बिरहना रोड स्थित एक देवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाके को भी सिमी ने रेखांकित किया है।

सिमी के संबंध आतंकवादी संगठनों से : उल्लेखनीय है कि प्रतिबंधित संगठन सिमी आतंकवादी संगठनों के लिए प्रदेश में सदस्य बनाने में सक्रिय है। इसके लिए लखनऊ सहित राज्य के दस जिलों मे सिमी की सक्रियता बढ़ गई है। खुफिया सूत्रों ने बताया कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार द्वारा सिमी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शाहिद बद्र फलाह के खिलाफ जनपद बहराइच में दर्ज मुकदमा वापस लिए जाने के बाद राज्य में सिमी की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं।

सिमी का लखनऊ, अलीगढ़, इलाहाबाद, फतेहपुर, सुल्तानपुर, गोंडा, फैजाबाद, रामपुर, आम्बेडकरनगर, मथुरा, आजमगढ़, बहराइच, कानपुर नगर, सिद्धार्थनगर, मुरादाबाद, वाराणसी, संत रविदास नगर, शाहजहाँपुर, आगरा, सहारनपुर, प्रतापगढ़, पीलीभीत, मेरठ व मुजफ्फनगर जिलों में खासा असर है।

सिमी का गठजोड़ कई आतंकवादी संगठनों के साथ है। यह भी सूचना मिली है कि सिमी आतंकवादी संगठन हूजी के लिए प्रदेश में सदस्य बना रहा है। सिमी का गठजोड़ हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तोइबा, जैश-ए-मोहम्मद और हरकत-उल-जेहाद-अल-इस्लामी (हूजी) से है।

मालूम हो कि सिमी के संबंध पाकिस्तान व बांग्लादेश आधारित जमात-ए-इस्लाम (जेईआई) से हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि सिमी की मजबूत पैठ उत्तरप्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और मणिपुर में है। केरल और तमिलनाडु में सिमी अपनी पैठ बना रहा है।

आईएसआई से आर्थिक मदद : सिमी संगठन प्रतिबंधित होने के कारण भूमिगत तरीके से अपने पैर पसार रहा है और सिमी को धन की आपूर्ति पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई मुहैया करा रही है। यह भी बात सामने आई है कि अमेरिका में बसे मुसलमान भी इस संस्था को आर्थिक मदद पहुँचा रहे हैं।

सिमी से हुआ सिम : हाल ही में यह बात सामने आई है कि संगठन ने अपना नाम सिमी से बदलकर सिम कर लिया है। सिमी पिछले चार दशक से देश में सक्रिय है। 1978 में इस संगठन की स्थापना अलीगढ़ में इस्लाम के प्रति जागृति लाने के उद्देश्य से हुई थी। 1993 में पहली बार इस संगठन की देश-विरोधी गतिविधियाँ सार्वजनिक हुईं। वर्ष 2002 में सिमी पर देशभर में प्रतिबंध लगा दिया गया था। अब सिमी अपना विस्तार कर संगठन को पूरी दुनिया में फैलाना चाहता है।

पिछली 27 मार्च को इंदौर में सिमी के चोटी के 13 नेताओं को मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और गोवा में आतंकी हमले की साजिश रचते समय गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसमें सफदर नागौरी सहित उत्तरप्रदेश कई राज्यों के शीर्ष नेता शामिल थे।

कानपुर में बैठक : खुफिया सूत्रों की मानें तो प्रदेश में सिमी का मॉड्यूल सर्वाधिक अलीगढ़ और कानपुर में सक्रिय है। पिछले दिनों सिमी ने धार्मिक अध्यापकों की भर्तियाँ अपने संगठन में जोर-शोर से की हैं।

स्थानीय अपराधियों और इस्लामिक छात्रों को जोड़कर सिमी अपना नेटवर्क बनाकर गड़बड़ी फैलाने में माहिर है। करीब तीन साल से खामोश सिमी कार्यकर्ताओं ने पिछले दिनों संवेदनशील शहर कानपुर में बैठक कर हलचल मचा दी है, जिससे खुफिया एजेसियाँ बेचैन हैं।
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