कोलकाता के आसमान में उड़ान भरते गिद्ध को देख पारसी समुदाय को आशा की किरण दिखाई दी है। गिद्धों की तीन साल तक गैर मौजूदगी के चलते पारसी लोगों की अंत्येष्टि के परंपरागत तरीके के खत्म हो जाने खतरा होने लगा था।
पारसी कार्यकर्ता धन बारिया ने गिद्धों के आगमन का स्वागत किया है। बारिया मुंबई में गिद्धों की सँख्या घटने के कारण टॉवर ऑफ साइलेंस पर मृत के शव को छोड़ने की परंपरा का विकल्प तलाशने में जुटी हैं।
बारिया ने बताया निश्चित तौर पर पारसी समुदाय के लिए यह अच्छी खबर हैं। बारिया मुंबई में रहती हैं। उन्होंने सबसे पहले टॉवर ऑफ साइलेंस पर पडे़ क्षत विक्षत शव के फोटो दुनिया के सामने पेश किए।
वह गिद्धों द्वारा शव खाने की इस परंपरा को बदलवाने के लिए लगातार कोशिश कर रही हैं। बारिया ने कहा यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। टावर के आसपास जमीन व्यापारियों द्वारा खजूर के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के चलते गिद्ध मर गए हैं और लापता हो गए हैं। कोलकाता के आसमान से 2005 में गिद्ध लापता हो गए। हाल में ही रेसकोर्स के निकट इनमें से 20 गिद्ध देखे गए हैं। इसके अलावा यहाँ विक्टोरिया मेमोरियल के निकट कुछ पेड़ों पर घोंसले देखे गए। इससे पता चलता है कि गिद्ध प्रजनन कर रहे हैं।
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