प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के तेरह आला ओहदेदारों की इंदौर में गिरफ्तारी के बाद इसके 'स्लीपर सेल' के सक्रिय होने की आशंका ने पुलिस की नींद उड़ा रखी है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि पुलिस को पूरा संदेह है कि देश में सिमी का 'स्लीपर सेल' सक्रिय है। स्लीपर सेल से जुड़े लोग संगठन के पूर्णकालिक सदस्य नहीं होते और यह खास मौके पर ही सक्रिय होते हैं।
सूत्रों ने कहा कि स्लीपर सेल के सदस्यों को इनकी काबिलियत और संगठन की जरूरत के मुताबिक काम सौंपा जाता है। काम को अंजाम देने के बाद यह लोग या तो भूमिगत हो जाते हैं या अपनी मूल पहचान में लौट जाते हैं। सूत्रों ने कहा कि सिमी के स्लीपर सेल में इसके कथित महिला दस्ते शाहीन फोर्स की सदस्य भी शामिल हो सकती हैं।
एक आला अफसर का कहना है वर्ष 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद इसकी सार्वजनिक गतिविधियों में स्वाभाविक तौर पर कमी आई और इसके सदस्याता अभियान की जैसी कमर टूट गई थी मगर बार-बार दहशत की वारदातों में सिमी का नाम आना साफ तौर पर इशारा करता है कि कुछ लोग ऐसे हैं, जो दबे-छिपे इसकी मदद करते रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि इस बात की पूरी आशंका है कि गुजरे सालों के दौरान सामने आई कुछ बड़ी आतंकी वारदातों में सिमी के स्लीपर सेल के सदस्यों की अहम भूमिका रही है। सूत्रों ने कहा कि पुलिस सिमी मामले की जाँच में कुछ सूत्र हाथ लगे हैं। अगर यह कड़ियाँ जुड़ गईं तो कई सफेदपोशों के चहरों से नकाब उठ सकता है।
गौरतलब है कि सिमी सरगना सफदर हुसैन नागौरी समेत संगठन के तेरह ओहदेदारों को इंदौर के श्यामनगर में 27 मार्च को दबोचा गया था, जो 11 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में हैं।
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