रोजे के दौरान मुस्लिम धर्मावलंबी द्वारा इंजेक्शन के जरिये दवाई लेने या सेलाइन के जरिये ग्लूकोज ग्रहण करने पर 'रोजा' खंडित नहीं माना जाएगा, लेकिन दमे के मरीज ने इन्हेलर का इस्तेमाल किया तो अवश्य उसका रोजा खंडित हुआ माना जाएगा।
इस आशय के निर्णय आज यहाँ इस्लामिक सिकहा एकेडमी ऑफ इंडिया के तीन दिवसीय 17वें सम्मेलन में लिए गए। अब यह निर्णय मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए मान्य होंगे।
अकादमी के महासचिव मौलाना खालिद सैपुल्ला रहमानी ने बताया कि मुस्लिम धर्मावलंबियों के बीच जिन मुद्दों पर विवाद की स्थिति बनती है, उन पर यह अकादमी निर्णय लेती है। उक्त निर्णय इसी परिप्रेक्ष्य में लिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में लगभग 400 मुफ्तियों और अनेक मुस्लिम विद्वानों ने शिरकत की। इसमें ईरान और इराक के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
रहमानी ने मध्यप्रदेश सरकार के इस रूख का समर्थन किया कि यौन शिक्षा देना उचित नहीं है। आतंकवाद से जुडे सवालों पर उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में इसके लिए कोई स्थान नहीं है, लेकिन यह पता लगाया जाना चाहिए कि यह क्यों पनप रहा है।
राज्य में प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े लोगों की व्यापक स्तर पर गिरफ्तारियों के संबंध में उन्होंने यह कहते हुए प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया कि वह सिमी के बारे में नहीं जानते।
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