शिवसेना ने आज अमिताभ बच्चन को 'मित्र' करार देते हुए कहा कि बच्चन किसी एक राज्य या क्षेत्र के नहीं, बल्कि देश के महानायक हैं।
कावेरी के पानी के मुद्दे पर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच छिड़े विवाद में रजनीकांत के आंदोलन के संदर्भ में पार्टी के मुखपत्र मराठी दैनिक 'सामना' में दो दिन पूर्व प्रकाशित एक रिपोर्ट में अमिताभ बच्चन की कथित रूप से आलोचना की गई थी।
अमिताभ बच्चन पहले से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अध्यक्ष राज ठाकरे की आलोचनाओं के निशाने पर थे। मीडिया में यह मुद्दा खूब उछाला गया, जिसके बाद आज 'सामना' के संपादकीय में अमिताभ बच्चन को लेकर पार्टी ने रुख नरम किया है।
संपादकीय में कहा गया है कि अमिताभ देश के महानायक हैं, इसलिए उन्हें 'जन्मभूमि' और 'कर्मभूमि' के विवाद में उलझाना ठीक नहीं है। विश्वास जताया गया है कि महाराष्ट्र के राजनीतिज्ञ अमिताभ से कुछ करने को कहेंगे तो वे इनकार नहीं करेंगे।
संपादकीय में अमिताभ और गाँधी परिवार के बीच संबंधों में आई खटास और उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की सरकार के अमिताभ को 'तंग करने' के रवैये की आलोचना की गई है।
संपादकीय में एक बार फिर रजनीकांत समेत अन्य कलाकारों के आंदोलन में शामिल होने की तारीफ की गई है और अफसोस व्यक्त किया गया कि शिवसेना जब महाराष्ट्र के हितों की बात करती है तो कलाकार उससे दूर रहते हैं और साथ नहीं देते तथा उस पर सांप्रदायिक या प्रांतवादी पार्टी होने के आरोप लगते हैं।
इससे पूर्व रविवार को 'सामना' को दिए बयान में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा था कि अमिताभ से उनके पारिवारिक संबंध हैं और पार्टी के मुखपत्र में छपी एक खबर का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने मनमाना अर्थ लगाया है। इस खबर में दावा किया गया कि मीडिया की ऐसी खबरों से बिगड़ जाएँ, इतने कच्चे हमारे संबंध नहीं हैं।
इस बयान में स्पष्ट किया गया है कि अखबार में छपी खबर को पार्टी का रुख मान लेना गलत है। हाँ, संपादकीय में ऐसी बात कही गई होती या शिवसेना प्रमुख ने ऐसा कोई बयान दिया होता तो बात अलग थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था।
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