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गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क में कुत्तों का आतंक
हिमालय शृंखला के गढ़वाल में अपनी जैवविविधता के लिए मशहूर गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क आवारा कुत्तों से त्रस्त है और अब इससे निपटने के लिए अधिकारी सशस्त्र बलों की मदद लेने वाले हैं। भारत तिब्बत सीमा के पास 10 हजार फीट ी ऊँचाई पर स्थित यह पार्क बर्फ में रहने वाले तेंदुओं और बराड़ हिरनों ओविस नाहुरा के लिए प्रसिद्ध है।

वन्यजीवों का शिकार करने वाले इन शिकारी कुत्तों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए वन्यजीव विभाग ने भारतीय सेना आईटीबीपी और सीमा सड़क संगठन बीआरओ को नोटिस भेजा है और जवानों से कुत्तों को भोजन न देने के लिए कहा है।

मुख्य वन्यजीव वार्डन एसके चंदोला के अनुसार हम आवारा कुत्तों के कारण बढ़ती परेशानी से वाकई चिंतिंत हैं, इसलिए हमने पार्क क्षेत्र के अंतर्गत कुत्तों को बढ़ावा न देने के लिए भारतीय सेना आईटीबीपी और बीआरओ को नोटिस भेजा है।

गंगोत्री पार्क की सीमा में भोजवासा, तपोवन नागा, सोनम और नीला पानी क्षेत्र कुत्तों से सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। बहरहाल, कुत्तों ने अब तक कितने जानवरों का शिकार किया है इस संख्या का पता नहीं है, लेकिन हाल ही में नीला पानी क्षेत्र में कुत्तों द्वारा तेंदुए के एक बच्चे को मारने के बाद अधिकारी सतर्क हो गए।

अधिकारियों ने कुत्तों द्वारा तेंदुए के बच्चे को मारे जाने की घटना की पुष्टि की और बताया कि दो तीन सैनिकों पर भी इन कुत्तों ने हमला किया। संवेदनशील सीमा क्षेत्र होने के कारण भारतीय सेना और आईटीबीपी ने पार्क में अपनी नियमित जाँच चौकियाँ बना रखी हैं। अकेले होने पर ये जवान आवारा कुत्तों को माँस और अन्य भोजन पदार्थ डालकर बढ़ावा देते हैं।

हाल ही में उत्तराखंड सरकार द्वारा गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क में पर्यटकों की आवाजाही संबंधी निर्णय के बाद पार्क खबरों में रहा था। सरकार अब गोमुख एवं अन्य गंगोत्री ग्लेशियरों को देखने के लिए प्रतिदिन 150 पर्यटकों को ही अनुमति देगी।

उत्तराखंड के मुख्य वन संरक्षक बीएस बरफाल के मुताबिक गोमुख देखने के लिए आने वाले पर्यटकों की अनिश्चित संख्या पर चिंता जताई जा चुकी है। अब हमने हर दिन के लिए इस संख्या को 150 तक सीमित करने का निर्णय लिया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले एक दशक से गंगोत्री में कांवड़ियों का भी जमावड़ा लगता है। जुलाई अगस्त में उत्सव के दौरान केवल एक दिन में हर रोज 2 हजार से 3 हजार कांवड़िये आते हैं जिससे पारिस्थितिक संबंधी चिंताएँ बढ़ रहीं हैं।

बरफाल के अनुसार पर्यटकों की संख्या निर्धारित करने के साथ ही गंगोत्री क्षेत्र में घोड़ों और खच्चरों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है और प्रवेश शुल्क भी बढ़ाया जा रहा है।
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