स्वस्तिक हिन्दू धर्म में शुभ की निशानी माना जाता रहा है, परंतु यहाँ एक नया मामला हुआ है। अहमदाबाद के दो डॉक्टर अपने बोर्ड पर रेडक्रॉस के स्थान पर स्वस्तिक का प्रयोग करने लगे हैं।
अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन द्वारा इसका प्रयोग करने से नया विवाद खड़ा हो गया है। इसको लेकर भारतीय चिकित्सा संघ यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्पष्टीकरण माँगा है। यह माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषंगी संगठन आरोग्य भारती के असर के कारण ऐसा किया गया है।
इंडियन मेडिकल एसो. ने सचेत किया है कि स्वस्तिक का प्रयोग रेडक्रॉस के स्थान पर करना अंतरराष्ट्रीय मानकों के विपरीत है, जो कि चिकित्सा के पेशे के लिए निर्धारित है। आरोग्य भारती के कोष प्रमुख और नेत्र विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण भावसार ने बताया कि पिछले साल सितंबर माह में यह देखने में आया कि रेडक्रॉस का दुरुपयोग किया जा रहा है। तब आरोग्य भारती ने तय किया कि स्वस्तिक इसका विकल्प हो सकता है।
उनका मानना है कि रेडक्रॉस यानी अस्पतालों पर लगने वाला लाल निशान रेडक्रॉस सोसायटी या सशस्त्र सेना की चिकित्सा सेवाओं के लिए है। यदि यह निशान कोई और उपयोग में लेता है तो उस पर 500 रु. का दंड भी है। वे बताते हैं कि हम जो स्वस्तिक प्रयोग में ला रहे हैं, वह नाजी के निशान से काफी अलग है।
फिलहाल दो ही डॉक्टर इस तरह का स्वस्तिक निशान प्रयुक्त कर रहे हैं। उन्होंने अपने क्लिनिक के बोर्ड पर लाल क्रॉस की जगह इसका प्रयोग किया है। डॉ. भावसार का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि डॉक्टर इसका प्रयोग करें, लेकिन हम ही जानकारी दे रहे हैं। हाल ही में एएमए ने अपने एक प्रकाशन में स्वस्तिक के प्रयोग के लिए प्रेरित किया है। (नईदुनिया)
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