बिहार के इस जिले में गाँव वालों ने अपनी नाराजी सरकार को दिखा दी है। भले ही इसमें उनका खुद का नुकसान था, लेकिन यह तरीका असहयोग का है। उनकी माँग विकास की है और विरोध का बिंदु है, जब तक विकास नहीं, तब तक बच्चों को पोलियो की दवा नहीं पिलाई जाएगी।
बात जिले के पथरा गाँव की है, जो दरियापुर विकासखंड में आता है। पोलियो की दवा पिलाने का गाँव वालों ने विरोध किया। अधिकारियों और नेताओं का ध्यान खींचने के लिए उन्होंने ऐसा किया। अपने गाँव में विकास न होने से उनकी नाराजी लाजमी थी।
एक ग्रामीण परमा महतो ने साफ कह दिया कि हम अपने बच्चों को पोलियो की दवा नहीं पिलाएँगे, ताकि राज्य प्रशासन को यह संदेश मिले। पिछले माह की बात है गाँव वालों ने तय कर लिया कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, बिजली नहीं आएगी, पीने का पानी नहीं मिलेगा, तब तक बच्चों को पोलियो की दवा नहीं पिलाई जाएगी।
नाराजगी के कारण : इनमें से अधिकांश बाँस की टोकनियाँ बनाने वाले बिंद जाति के लोग हैं। यहाँ पर साक्षरता की दर भी कम है। ये झोपड़ी में रहते हैं। पीने के पानी की भी गाँव में व्यवस्था नहीं है। गाँव वालों की यह शिकायत है कि आवेदन करने के बाद भी उनके राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत जॉब कार्ड जारी नहीं किए गए हैं। साथ ही इंदिरा आवास योजना के तहत उन्हें ईंट के बने घर भी नहीं मिल सके हैं।
इस तरह का विरोध मधुबनी जिले के सुगौना ग्राम में भी किया गया। राज्य के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के विरोध की खबरें हैं। पोलियो के खिलाफ लड़ाई में बिहार में काफी काम होना है। 2008 के पहले तीन माह में यहाँ पर पोलियो के 100 नए मामले सामने आए हैं।
पिछले साल देश में पोलियो के 864 मामले सामने आए थे। बिहार व उत्तरप्रदेश आर्थिक और सामाजिक मापदंड के लिहाज से बीमार माने जाते हैं। यहाँ पर सबसे ज्यादा मामले नजर आते हैं। बिहार में पिछले साल 396 मामले सामने आए, जबकि 2006 में 61 मामले ही थे।
पहले भी किया विरोध : गाँव के युवक कमलेश का कहना है कि यह बहिष्कार तब तक जारी रहेगा, जब तक कि सड़क, बिजली, पानी और गाँव में स्कूल नहीं खुलेगा। बहिष्कार की जानकारी लगते ही स्वास्थ्य अधिकारी और स्थानीय नेता पहुँचे और उन्होंने गाँव वालों को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन बिना विकास वे कोई बात करने को तैयार नहीं थे। यह पहला कार्यक्रम नहीं था, जिसका उन्होंने बहिष्कार किया, अपनी माँग को आवाज देने के लिए इन लोगों ने पहले भी एक सरकारी कार्यक्रम को होने नहीं दिया। सारे गाँव वाले एकत्र हो गए और उन्होंने गाँव में डीडीटी का छिड़काव नहीं करने दिया। (नईदुनिया)
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