भारतीय जनशक्ति (भाजश) के असंतुष्टों की बुधवार को दिल्ली में हुई बैठक में नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष उमा भारती पर संविधान के अनुरूप कार्य नहीं करने का आरोप लगाते हुए उन्हें अपना नेता मानने से ही इनकार कर दिया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजश के संस्थापक सदस्य प्रहलाद पटेल की मौजूदगी में हुई बैठक में गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और चंडीगढ़ के भाजश के असंतुष्ट धड़े के नेता शामिल हुए। इन नेताओं ने लिखित में सुश्री भारती को नेता मानने से इनकार कर दिया।
पटेल ने फोन पर बताया कि बैठक में शामिल नेताओं का मानना है कि भाजश अध्यक्ष संविधान के अनुरूप कार्य नहीं कर मनमर्जी से निर्णय ले रही हैं। इसी के चलते हाल में भाजश के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में संघप्रिय गौतम की नियुक्ति की गई है।
कभी सुश्री भारती के कट्टर समर्थक रहे पटेल ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के दौरान भी दस राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष सुश्री भारती को अध्यक्ष बनाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी हित में इस बात को दरकिनार कर दिया गया था। इसके बावजूद पार्टी की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया और संविधान के अनुरूप निर्णय नहीं लिए गए।
यह पूछे जाने पर कि क्या अब भाजश दो फाड़ हो गई है, पटेल ने कहा कि वे तो पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं और इस पार्टी के हित में ही कार्य करेंगे। बैठक में मौजूद अन्य नेता भी पार्टी के गठन के बाद से ही इस दल से जुड़े हुए हैं और वे सभी देश में आगामी चुनावों के मद्देनजर पार्टी को मजबूती प्रदान करना चाहते हैं।
पटेल ने बताया कि आए दिन पार्टी अध्यक्ष के भाजपा में वापस जाने की खबरें मीडिया में आ रही हैं। पार्टी की स्थिति मजबूत नहीं होने से नेताओं, विशेषकर उन कार्यकर्ताओं में असमंजस है, जो पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा में वापसी का मन बना रहे हैं, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। अलबत्ता, उनके गृह जिला नरसिंहपुर के कुछ कार्यकर्ता जरूर निर्णायक स्थिति चाहते हैं और वे हाल में उनसे (पटेल से) मिले थे। पटेल ने कहा कि उन्होंने ऐसे कार्यकर्ताओं से कहा है कि इस मुद्दे पर नवरात्रि के बाद विचार किया जा सकता है।
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