देश के सबसे बड़े सूबे के रसूखदार आईएएस अधिकारियों की एसोसिएशन विभाजित हो गई है। कारण इस एसोसिएशन ने पिछले दिनों आजादी के बाद से उनके संवर्ग के किसी अधिकारी को कैबिनेट सचिव न बनाकर सरकार ने गैर संवर्गीय अधिकारी की ताजपोशी इस पद पर होने पर समूचे संवर्ग ने इसका जमकर अंदरूनी विरोध किया था।
आखिरकार मुख्यमंत्री ने कैबिनेट सचिव के अधिकारों में कटौती कर दी थी। परिस्थितियाँ तेजी से बदलीं अब उप्र आईएएस में दो लॉबी में विभाजित हो गई है। कहा जा रहा है कि एक सरकार समर्थित (या बसपा समर्थित) है और दूसरी सरकार विरोधी (सपा समर्थित)।
आश्चर्यजनक तरीके से विभाजन और जबरन कब्जे से आहत एसोसिएशन की अध्यक्ष नीरा यादव ने सेवानिवृत्त होने के तीन महीने पहले ही वीआरएस लेकर आरोप-प्रत्यारोप के कीचड़ से पिंड छुड़ा लिया है। एसोसिएशन के सचिव संजय भूसरेड्डी नियम-कानूनों की दुहाई दे रहे हैं, जबकि जबरन एसोसिएशन पर कब्जा जमाने वाले आईएएस अपनी मूँछों पर ताव दे रहे हैं।
आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष नीरा यादव जब नियुक्ति विभाग से एलटीसी स्वीकृत कराकर मुख्यालय से बाहर गई हुई थीं तभी सरकार के एक प्रचलित जाँच अधिकारी (पंचम तल के एक अधिकारी) के इशारे पर 26 मार्च को सत्ता समर्थित आईएएस अधिकारियों द्वारा एक बैठक कर उन अधिकारियों ने 1971 बैच के आईएएस विनोद मल्होत्रा को एसोसिएशन का अध्यक्ष तथा 1993 बैच के आईएएस चन्द्रभानु को एसोसिएशन का सचिव नामित कर दिया।
उल्लेखनीय है कि विनोद मल्होत्रा राजस्व परिषद के अध्यक्ष तथा चन्द्रभानु लखनऊ के जिलाधिकारी हैं। इससे पहले एसोसिएशन की अध्यक्ष नीरा यादव तथा सचिव संजय भूसरेड्डी थे। एसोसिएशन की 16 दिसम्बर, 2006 को आयोजित एजीएम (सामान्य सभा) द्वारा संजय भूसरेड्डी को सर्वसम्मति से लगभग 350 आईएएस सदस्यों की उपस्थिति में अवैतनिक सचिव निर्वाचित किया गया था। यही नहीं भूसरेड्डी को लगातार चौथे वर्ष सर्वसम्मति से निर्वाचित किया गया था।
एसोसिएशन की यह संवैधानिक परम्परा रही है कि प्रदेश में तैनात वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी इसका अध्यक्ष होता है। यदि सामान्य सभा से पूर्व अध्यक्ष पद रिक्त होता है तो उस समय कार्यकारिणी समिति द्वारा वरिष्ठता के आधार पर अध्यक्ष मनोनीत कर लिया जाता है।
इसी के अनुसार शम्भूनाथ के सेवानिवृत्त होने के बाद जब यह पद रिक्त हुआ तो उस समय प्रदेश में तैनात वरिष्ठतम आईएएस बृजेन्द्र को 1972 बैच के आईएएस रमणी की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी की बैठक में निर्विरोध रूप से अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। इसी वर्ष बृजेन्द्र के असामयिक निधन से जब 21 जनवरी को यह पद रिक्त हुआ तो संजय भूसरेड्डी द्वारा 1 फरवरी को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से प्रदेश में वरिष्ठतम आईएएस की हैसियत से नीरा यादव को अध्यक्ष निर्वाचित किया गया था।
गत 26 मार्च को सत्ता समर्थित आईएएस अधिकारियों ने उस समय मौजूद एसोसिएशन की अध्यक्ष नीरा यादव और सचिव संजय भूसरेड्डी को दरकिनार कर नया अध्यक्ष और सचिव नामित कर लिया जो कि आईएएस एसोसिएशन के संविधान, नियम और परंपराओं को घोर उल्लंघन था।
अध्यक्ष नीरा यादव अवकाश उपरान्त जब राजधानी पहुँछी तब उन्होंने 28 मार्च को आईएएस एसोसिएशन द्वारा संविधान नियम और परम्पराओं का घोर उल्लंघन किए जाने से आहत होकर इसकी सूचना मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को दी थी और अनुरोध किया था कि यदि कोई भी अधिकारी सचिव या अध्यक्ष की हैसियत से उनसे कोई पत्राचार करे तो उसे अनाधिकृत एवं शून्य माना जाए। नीरा यादव ने एसोसिएशन की तरफ से मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेट हेतु समय भी माँगा था। अचानक नीरा यादव को न जाने क्या हो गया? रातो-रात उन्होंने अपना निर्णय बदला और सरकार से वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्त) हेतु आवेदन दिया और सरकार ने दरियादिली दिखाई और रातो-रात उन्हें सेवानिवृत्त दे दी गई। समझा जाता है कि कई मामलों में आरोपित नीरा यादव ने सरकार से मोर्चा लेना ठीक न समझा और अपने सेवा अवकाश ग्रहण करने के तीन महीने पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्त ले आईएएस एसोसिएशन की खींचातानी से खुद को अलग कर लिया। अब अध्यक्ष पद पर विनोद मल्होत्रा वरिष्ठ आईएएस को लेकर विवाद तो नहीं बचा किन्तु सचिव पद को लेकर विवाद बना हुआ है। निर्वाचित संजय भूसरेड्डी के समर्थन में ज्यादातर आईएएस अधिकारी हैं किन्तु यह सारा खेल कराने वाले पंचम तल में बैठने वाले नौकरशाह और प्रचलित जाँच अधिकारी का खेल जारी है। यह भी कहा जा रहा है कि आईएएस एसोसिएशन में जातिवाद को लेकर और दो फाड़ हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं।
|