उत्तरप्रदेश में कांग्रेस को मजबूत बनाने और सांप्रदायिक शक्तियों को रोकने के लिए हम किसी भी सेक्यूलर पार्टी चाहे वह सपा हो या बसपा उससे समझौता कर सकते हैं, हमें किसी से परहेज नहीं।
मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने सोमवार को विशेष बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता कांग्रेस को प्रदेश में मजबूत करना है तथा भाजपा जैसी सांप्रदायिक शक्तियों को रोकना है, इसके लिए हम किसी भी राजनीतिक दल से हाथ मिला सकते हैं। क्या उसमें बसपा भी हो सकती है, तो इस पर उन्होंने कहा कि यह सपा, बसपा में से कोई भी हो सकती है।
कांग्रेस को कैसे मजबूत बनाएँगे, इस पर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी ने साफ किया कि सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ लड़ने वाले सभी राजनीतिक दलों के लिए कांग्रेस के दरवाजे हमेशा खुले हैं और आगे भी खुले रहेंगे।
उन्होंने कहा कि अगर सपा या बसपा आगे भी सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी तो इन्हें साथ लेने में कोई बुराई नहीं है। कांग्रेस के दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन के दूसरे व अंतिम दिन भी पार्टी नेता और कार्यकर्ता सपा से दूरी या नजदीकी के फेर में ही पड़े रहे। कुछ लोगों का कहना था कि बसपा और भाजपा को रोकने के लिए मुलायम जरूरी हैं, जबकि कुछ मुलायम पर पूर्व में भाजपा से हाथ मिलाने का आरोप लगाकर उन्हें धोखेबाज बता रहे थे। दिग्विजयसिंह ने पहले तो कहा कि वह सांप्रदायिक शक्तियों से लड़ने के लिए किसी भी राजनीतिक दल से हाथ मिला सकते हैं फिर वह चाहे सपा ही क्यों न हो, लेकिन रात होते-होते उनके रुख में अचानक बदलाव हो गया और उन्होंने सपा प्रमुख मुलायम को एक गैर भरोसेमंद नेता बता डाला।
सपा मुद्दे पर पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के तेवर काफी तीखे थे और उन्होंने मंच से ही साफ कर दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने साफ कर दिया है कि हमारी पार्टी प्रदेश में अपने बूते पर चुनाव लड़ेगी।
उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि सपा बसपा एक क्षेत्रीय दल है और कांग्रेस एक राष्ट्रीय दल। इन दोनों दलों से कांग्रेस का क्या मुकाबला।
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला भी सपा सुप्रीमो के खिलाफ जमकर बोले और उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों से समझौता करने वाली पार्टी के साथ किस तरह से तालमेल बैठाया जा सकता है।
सपा से किसी समझौते की बाबत केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री प्रकाश जायसवाल ने बातचीत में कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों के विरोध में हम आम कांग्रेसियों की भावनाओं का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि अभी लोकसभा चुनाव काफी दूर हैं अभी हमारी पहली प्राथमिकता अपने आधारभूत ढाँचे को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले भी कांग्रेस को समर्थन कर चुकी है और कांग्रेस भी सपा का समर्थन कर चुकी है। जायसवाल ने कहा कि सपा से हमारी कोई लड़ाई नहीं है, विचारों की लड़ाई है केवल। सपा से समझौता करना है या नहीं इसका फैसला पार्टी हाईकमान करेगा। इसके विपरीत पार्टी का आम कार्यकर्ता सपा से दूरी बनाए रखने के पक्ष में है।
कई कार्यकर्ताओं का कहना था कि सपा पहले पार्टी को धोखा दे चुकी है अब फिर उससे हाथ मिलाना गलत है। इसके बावजूद भी अगर पार्टी सपा से हाथ मिलाती है तो हाईकमान का फैसला सिर-आँखों पर।
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