- प्रेमविजय पाटिल व अनवर खान
धार व झाबुआ जिले के लाखों लोगों के लिए खुश खबर! इंदौर से पीथमपुर की ओर तथा दाहोद से झाबुआ की ओर करीब 15-15 किमी क्षेत्र में रेलवे लाइन बिछाने के लिए पश्चिम रेलवे ने सर्वे कार्य पूर्ण कर लिया है। शेष कार्य भी एक माह में पूरा हो जाएगा। लेकिन पीथमपुर के ग्राम बंजारी में महू-नीमच राष्ट्रीय राजमार्ग पर फोरलेन का घुमावदार मोड़ (कर्व) इस परियोजना के लिए चिंता का विषय हो गया है।
यदि कलेक्टर व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कोई हल नहीं निकाला जाता है तो योजना खटाई में पड़ सकती है या फिर पीथमपुर की औद्योगिक इकाइयाँ रेल सुविधा से वंचित हो सकती हैं। गौरतलब है कि 8 फरवरी को प्रधानमंत्री व रेलमंत्री ने दाहोद-इंदौर व धार-छोटा उदयपुर रेल परियोजना का शिलान्यास किया था।
इसके बाद रेल बजट पारित हुआ और उसमें राशि बहुत ही कम स्वीकृत हुई। कई व्यावहारिक दिक्कतें परेशानी का कारण बन गई हैं। इंदौर-दाहोद के बीच करीब 200.97 किमी पर रेल लाइन बिछाना है, जिसके लिए 678.56 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। परियोजना का एक बार सर्वे फिर से करना होगा। रेलवे के दल ने सर्वे प्रारंभ कर दिया है। इस संबंध में पश्चिम रेलवे चर्च गेट मुंबई के मुख्य अभियंता डीएस चौहान ने बताया कि दो टीमें सर्वे कार्य कर रही हैं। दाहोद से झाबुआ की ओर करीब 20 किमी तक का सर्वे कार्य हो चुका है। दाहोद क्षेत्र में किसी तरह की कोई समस्या नहीं आ रही है। सर्वे में दो टीमें और शामिल करने जा रहे हैं। यह सर्वे आगामी एक माह में पूर्ण कर लिया जाएगा। इंदौर से पीथमपुर की ओर भी हम करीब 20 किमी तक सर्वे कर चुके हैं।
राजमार्ग बाधक : चौहान ने बताया कि सर्वे में पता चला कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा ठीक उसी प्रकार से फोरलेन का घुमावदार मोड़ यानी कर्व ग्राम बंजारी क्षेत्र में बना दिया गया है, जैसा कि रेलवे के लिए बनाया जाना था। इससे रेल परियोजना के लिए चिंता की स्थिति बन गई है। करीब 900 मीटर का यह हिस्सा परियोजना के लिए कई मायने में परेशानी खड़ी कर सकता है। इस कर्व के मामले में कोई भी विकल्प नहीं है। विकल्प केवल इतना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और कलेक्टर से इस बारे में चर्चा की जाए।
अधिग्रहण हेतु चर्चा : मुख्य अभियंता ने बताया कि अगले माह हम धार व झाबुआ कलेक्टरों को पत्र लिखकर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई के लिए कहेंगे, जिससे कि काम तेजी से किया जा सके। मुख्य बात यह है कि जमीन को लेकर जितनी जल्दी कार्रवाई हो जाए, उतना कार्य तेजी से शुरू हो पाएगा। इस बात की आशंका थी कि पीथमपुर में जिस जमीन पर उद्योग विस्थापित हो चुके हैं, वह भी रेलवे सर्वे के अंतर्गत आ रही थी। मुख्य अभियंता इंदौर ने पीथमपुर क्षेत्र में सर्वे के बाद बताया कि उद्योग से कोई परेशानी नहीं है।
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