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इंदौर में 26 दिनों से डेरा डाले थे आतंकवादी
केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम करेगी पूछताछ
प्रतिबंधित संगठन सिमी के 13 आतंकियों के इंदौर में पकड़े जाने की खबर ने लोगों की नींद उड़ा दी है। ये आतंकवादी 1 मार्च से यहाँ थे अर्थात 26 दिनों से इंदौर में डेरा डाले हुए थे। आमतौर पर शांत रहने वाले तथा देर रात तक सड़कों पर जागने वाले इस शहर में आतंकियों की उपस्थिति ने लोगों को बेचैन कर दिया है।

आतंकी इंदौर में क्या कर रहे थे तथा उनका लक्ष्य क्या था यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन इनकी उपस्थिति मात्र से ही खतरनाक संदेश स्पष्ट है। देश के विभिन्न राज्यों में हुई बम विस्फोटों की कई बड़ी घटनाओं से इस समूह के जुड़े होने की पुष्टि पुलिस कर रही है।

यहाँ तक कि हरियाणा में समझौता एक्सप्रेस (पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन) में हुए विस्फोट में भी इसी समूह का हाथ बताया जा रहा है। विभिन्न राज्यों की पुलिस तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय का दल आतंकियों से पूछताछ करेगा।

टैक्सी ड्राइवर ने पत्र लिखा था : बुरहानपुर के एक टैक्सी ड्राइवर ने पुलिस को पत्र लिखकर जानकारी दी थी। आईजी के अनुसार पत्र में उसने सूचित किया था कि उसकी टैक्सी में कुछ लोग सवार हुए थे जो अरबी भाषा में बातें कर रहे थे। वे किसी वेश्या के पास भी जाने वाले थे। उनकी बातों से ऐसा लगा कि वे 24 मार्च को कोई वारदात करने वाले हैं। इस आधार पर पुलिस ने 24 मार्च को पूरी सतर्कता बरती।

सभी घटनाओं में सिमी का हाथ रहा : पुलिस का कहना है कि मुंबई, मालेगाँव, शिर्डी, हैदराबाद, उत्तरप्रदेश, समझौता एक्सप्रेस सहित अन्य स्थानों पर विस्फोट व अन्य प्रकार की जितनी भी आतंकी वारदातें हुईं सभी में कहीं न कहीं सिमी का हाथ होने की बात सामने आई है। आईबी की टीम करीब ढाई साल से सफदर नागोरी तथा अन्य लोगों के पीछे लगी हुई थी।

मुंबई ब्लास्ट में यही नाम आए थे : आईजी के अनुसार मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपी अहसान सिद्दीकी को जब पुलिस ने पकड़ा था तो उसने बताया था कि सिमी का ट्रेनिंग कैम्प उज्जैन में लगा था।

वहाँ आतंकवादियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया था। आरोपी अहसान ने सिमी के जिन लोगों के नाम लिए थे वे सभी वही लोग थे जिन्हें पुलिस ने कल रात इंदौर से गिरफ्तार किया है।

आईएसआई से नफरत : पकड़े गए लोगों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि सिमी के कार्यकर्ता पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से नफरत करते हैं। उनका कहना है कि हम हमारे नेटवर्क से काम करते हैं। नेटवर्क के लिए पैसा भी भारत में ही एकत्र होता है।

जिलेवार मिला हिसाब : सिमी की गतिविधियों के लिए जिलेवार राशि एकत्र होती है। कई जिलों से एकत्र की गई राशि का हिसाब पुलिस के हाथ लगा है। पुलिस के अनुसार इंदौर में एक माह में 1 लाख 34 हजार रु. की राशि एकत्र की गई थी। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह राशि किन लोगों से ली गई थी। वे भी पुलिस के घेरे में आएँगे।

दिल्ली से टीम पहुँची : आरोपियों से पूछताछ के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के आठ अधिकारियों की टीम पीथमपुर पहुँच चुकी है। विशेषज्ञों की एक और टीम पहुँच रही है। इसके अलावा देश के कई राज्यों की पुलिस की टीमें भी पीथमपुर पहुँच रही हैं। आईजी के अनुसार शुक्रवार को आरोपियों को कोर्ट के समक्ष पेश कर रिमांड माँगा जाएगा। सभी आरोपी दुर्दांत अपराधों में शामिल हैं। पूछताछ काफी लंबी चलेगी। इन सभी के विरुद्ध देशद्रोह, विधि विरुद्ध क्रियाकलाप तथा धार्मिक उन्माद फैलाने के प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

सिमी में सफदर की भूमिका : सफदर नागौरी ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह सिमी का पूरे देश का चीफ रह चुका है। पूर्व में 38 वर्ष की आयु सीमा तक ही सिमी में रहा जा सकता था। इस प्रतिबंध के कारण उसने सिमी की सदस्यता छोड़ी और अपना संगठन बना लिया। उसका कहना है कि सिमी नरम दिल वाला संगठन बनने की राह पर चल रहा है, जबकि उसे पूरी तरह उग्रवादी होना चाहिए। विमी, सिम, मुस्लिम टेक्निकल पर्सन ऑर्गनाइजेशन आदि नामों से सफदर के संगठन चल रहे हैं।

आईजी का कहना है कि सफदर के संगठन का नाम जो भी हो, लेकिन पुलिस और केंद्रीय गुप्तचर एजेंसी इन्हें सिमी के नाम से पहचानती है। सफदर का यह भी कहना है कि सिमी का वर्तमान अध्यक्ष मिस्बाह नरम दिल है। सफदर बहुत पहले इंदौर आ चुका है। वर्ष 2000 में पहली बार जब सिमी पर प्रतिबंध लगा तब से वह फरार था। सफदर का कहना है कि सिमी के बड़े नेता के पद पर अब टेक्निकल एक्सपर्ट को ही लिया जा रहा है। सिमी में कई इंजीनियर शामिल हैं।

गुप्तचर विभाग की असफलता नहीं : पत्रकारों के प्रश्नों के जवाब में आईजी ने कहा कि सफदर सहित कई आतंकियों की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं मिलना गुप्तचर शाखा की असफलता नहीं कही जा सकती। केंद्रीय गुप्तचर ब्यूरो (आईबी) का काम भी सूचना संकलन का है। जैसे ही आईबी ने सूचना दी, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।

इंदौर पुलिस को पूरे ऑपरेशन में शामिल न करने के संबंध में आईजी ने कहा कि यहाँ का पुलिस बल रंगपंचमी पर व्यस्त था। धार के पुलिस बल से अभियान की शुरुआत कराई गई और अंत तक कमान उसी दल को सौंपी गई, ताकि कहीं भी किसी तरह की गलतफहमी न हो। इस दल की कमान धार के एएसपी वीरेंद्रसिंह ने संभाल रखी थी।

इंदौर में शिविर लगाया था : सफदर ने पुलिस को बताया कि इंदौर में सालाना शिविर आयोजित किया जा रहा था। इसमें पूरे देश से सिमी के वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे थे। मकान से जब्त हुई सामग्री को पढ़ने से प्रारंभिक तौर पर जानकारी मिलती है कि पूरे विश्व में सत्ता के विरुद्ध इस्लामिक वर्ल्ड की स्थापना करना सिमी का मूल लक्ष्य है। इसके लिए पूरे विश्व में इस्लामिक संगठन बनाना है।

आईजी अनिल कुमार का कहना है कि इन आरोपियों तथा इनके संगठन के संबंध अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन से भी हो सकते हैं। लश्कर-ए-तोइबा व अन्य संगठनों से भी सिमी के संबंध सामने आए हैं।

कमांडो जैसी ट्रेनिंग : जब्त दस्तावेजों से यह पता चला है कि सिमी के उग्रवादियों को कमांडो जैसी ट्रेनिंग दी जाती है। जैसे 25-30 किमी तक लगातार पैदल चलना। लगातार कई किलोमीटर तक तैरना। कठिन से कठिन परिस्थितियों में प्रशिक्षित कमांडो की तरह कार्य करने की आदत डालना आदि।

कैसे पूरा हुआ अभियान : पूरे अभियान का नेतृत्व करने वाले धार के एएसपी वीरेंद्रसिंह ने पत्रकारों को बताया कि आईजी अनिल कुमार से सूचना मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। पुलिस दल के साथ पहला छापा पीथमपुर में दिन में ही मारा गया। वहाँ कुछ नहीं मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि कुछ लोग वहाँ थे जो छापे के पूर्व निकल चुके थे। वहाँ से सिमी की प्रचार सामग्री हाथ लगी। इसी बीच आईजी ने कहा कि इंदौर में श्याम नगर में गफ्फार बेकरीवाले के मकान की तीसरी मंजिल पर कुछ लोगों की मौजूदगी की जानकारी मिली है।

जिला विशेष शाखा के योगेश शर्मा तथा साहेबसिंह को सादे कपड़ों में वहाँ भेजा गया। वे मकान की भौगोलिक स्थिति देखकर आए और बताया कि सूचना सही लग रही है। इसके बाद मकान पर छापा मारने की योजना बनाई। एसटीएफ के जो कर्मी हमें दिए गए थे उन्होंने तथा अन्य अधिकारियों व कर्मियों ने बुलेटप्रूफ जैकेट व हेलमेट पहनकर सुबह साढ़े 4 से 5 बजे के बीच मकान को चारों ओर से घेरा। तीसरी मंजिल स्थित कमरे के दरवाजे को खटखटाया।

उम्मीद थी कि दरवाजा तोड़ना पड़ेगा, लेकिन आरोपियों को किसी के आने का इंतजार था, इसलिए उन्होंने दरवाजा खोला। पुलिस ने तुरंत अंदर घुसकर चारों ओर कब्जा कर लिया। हॉल में 9 लोग थे। उन्हें दीवार की ओर मुँह करके हाथ ऊँचे कर खड़ा कर दिया गया और सभी को बंदूक के निशाने पर ले लिया गया। हॉल के साइड वाले कमरे में सफदर, कमरुद्दीन, हाफिज और शिवली सोए थे। उन्हें भी तुरंत पुलिस ने अपने निशाने पर ले लिया।

पकड़े गए इंदौर में, प्रकरण पीथमपुर में : आरोपियों की गिरफ्तारी इंदौर में हुई और प्रकरण पीथमपुर थाने में क्यों दर्ज हुआ? इस सवाल के जवाब में आईजी ने कहा कि यह पुलिस तय करती है कि कहाँ प्रकरण दर्ज होगा। कार्रवाई पीथमपुर से शुरू हुई थी और वहाँ से होते हुए इंदौर तक पुलिस टीम आई। जहाँ से पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी, वहीं प्रकरण दर्ज किया। कार्रवाई में एसटीएफ की कोई भूमिका नहीं थी।

मकसद शिविर ही था या कुछ और : आरोपियों ने इंदौर का चयन क्यों किया? इस संबंध में आईजी का कहना है कि इंदौर का स्वरूप बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति में यहाँ भी सिमी अपनी गतिविधियाँ चलाना चाहता है। आरोपियों ने शिविर के लिए रंगपंचमी का दिन चुना था। इस दौरान पुलिस की व्यस्तता अधिक रहती है। इंदौर में उनका टारगेट क्या था, यह पूछताछ के बाद ही पता चल सकेगा।

विक्रम विवि का छात्र रहा है सफदर : आईजी ने बताया कि सफदर नागौरी उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय का छात्र रहा है। उसने विक्रम विवि से मॉस कम्युनिकेशन विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की थी।

वह विवि का मेधावी छात्र रहा। उसने थीसिस भी लिखी थी, जिसका विषय था- कश्मीर की बर्फ कब पिघलेगी। थीसिस पढ़ने से पता चलता है कि उसे आतंकवादियों के बारे में कितनी जानकारियाँ हैं और इस क्षेत्र में उसकी रुचि कितनी है।

उल्लेखनीय है कि इस थीसिस के बारे में पिछले दिनों जब विवाद उठा तो थीसिस आश्चर्यजनक ढंग से विक्रम विवि से गायब हो गई। विवि प्रशासन ने थीसिस गायब होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई है।
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