लगभग सत्ताईस घंटे तक धरती की कोख से मौत के मुँह से निकलने के बाद माँ की गोद में पहुँची नन्हीं वंदना अब खुली हवा में साँस ले रही है।
भाग्य, सेना के जवानों के अथक प्रयास से मौत के मुँह से बाहर निकाला गया। आज वह माँ की गोद में चैन की नींद सो रही है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि कल रात लगभग साढे़ दस बजे वंदना को अस्पताल लाया गया, जहाँ देर रात तक गहन परीक्षण किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक वंदना इस समय बुखार से पीड़ित अवश्य है लेकिन चिंता जैसी कोई बात नहीं है।
एक्स-रे रिपोर्ट में उसकी हड्डियां टूटी नहीं पाई गई। बोरवेल में रगड़ खाते हुए 45 फुट तक गिर जाने के कारण उसके शरीर पर कई जगह खरोंच के निशान हैं, जो उसे दर्द दे रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार उसे अभी पाँच दिन तक गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखा जाएगा। उसके बाद ठीक होने पर उसे परिवार वालों को सौंप दिया जाएगा। उमस भरे माहौल में 27 घंटे गुजारने के बाद कल रात वंदना चार घंटे सोई और आज सुबह दस बजे से माँ की गोद में है।
गौरतलब है कि बंगाली कुशवाह की ढाई वर्षीया पुत्री वंदना मंगलवार की शाम 180 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी और 45 फीट पर जाकर अटक गई। सेना एवं जिला प्रशासन के अथक प्रयास से 27 घंटे के बाद वंदना को कल रात बोरवेल से सकुशल बाहर निकाला गया।
जिन्दगी की जंग जीत गई वंदना
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