गोवा सरकार ने फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टर सिल्वानो सापेका को निलंबित कर दिया, जिन्होंने मारी गई ब्रिटिश किशोरी स्कारलेट किलिंग की पहली आटोप्सी की थी और बाद में अपनी अंतिम राय में उसकी हत्या की संभावना जताई थी।
दिलचस्प बात तो यह है कि सरकार ने उन्हें गैर जिम्मेदाराना मीडिया बयान देने के लिए निलंबित किया है, जिसके कारण ब्रिटिश लड़की की मौत के मामले में जाँच प्रभावित हुई।
सरकार द्वारा संचालित गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से संबद्ध इस फोरेंसिक विशेषज्ञ ने अपनी अंतिम राय में कहा था कि इस लड़की को पाँच से दस मिनट तक समुद्र के पानी में डुबोकर रखा गया, जिससे उसकी मौत होने की संभावना है।
डॉ. सिल्वानो ने पन्द्रह वर्षीय इस ब्रिटिश लड़की के शव पर मिले खरोंच के निशान के बारे में कुछ भी नहीं कहा था। इस लड़की का शव यहाँ अंजना तट पर पाया गया।
स्कारलेट की माँ फियोना मेकियोन ने पहली आटोप्सी पर आधारित पुलिस जाँच पर असंतोष जताया था और दूसरी आटोप्सी करवाने की माँग की थी।
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