बिहार में देह व्यापार को रोकने के लिए राज्य पुलिस ने अपनी कार्यशैली में परिवर्तन करते हुए ऐसे मामलों में पकड़ी गई लड़कियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करके उनका पुनर्वास शुरू कर दिया है।
इस प्रयास के तहत अब तक पूरे प्रदेश में एक दर्जन ऐसी लड़कियों के पुनर्वास की व्यवस्था की जा चुकी है।
पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिहार पुलिस ने अब वेश्यालयों से लड़कियों के पकड़े जाने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाय उन्हें स्वयंसेवी संगठनों की मदद से पुनर्वासित करने की योजना बनाई है।
बिहार पुलिस ऐसे मामलों में अब लड़कियों के बजाय उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेलने वालों के खिलाफ मुकदमा करेगी। इसके अलावा पुलिस अब उन लोगों के खिलाफ भी देह व्यापार निषेध अधिनियम के तहत मुकदमा करेगी, जो बरामदगी के समय इन लड़कियों के साथ पकड़े जाएँगे।
राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) एके गुप्ता ने बताया कि इस योजना के तहत मुजफ्फरपुर, गया और बेगूसराय जिलों में एक दर्जन लड़कियों को बरामद कर उनका पुनर्वास किया जा चुका है।
गुप्ता ने बताया कि पुलिस ऐसे मामलों में अपना अनुसंधान उसी प्रकार करेगी जैसा संगठित अपराधों के मामलों में किया जाता है। उन बार और मसाज पार्लरों को छापा मारकर तुरंत बंद कर दिया जाएगा, जहाँ देह व्यापार की सूचना मिलेगी। गत दिनों गया में ऐसे चार मसाज पार्लर सील किए गए हैं।
गुप्ता ने बताया कि ऐसी जगहों पर छापामारी के दौरान पुलिस टीम के साथ दंडाधिकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग भी रहेंगे। इन जगहों से बरामद लड़कियों को पुलिस या तो उनके घर पहुँचा देगी अथवा उन्हें सुरक्षागृहों या फिर स्वयंसेवी संगठनों के पुनर्वास केन्द्रों में भेजा जाएगा।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र मादक द्रव्य एवं अपराध नियंत्रण कार्यालय ने इस कार्य के लिए तीन स्वयंसेवी संगठनों पटना की प्रयास भारती ट्रस्ट, दानापुर की शक्तिवर्द्धिनी और मोतिहारी की प्रयास संस्था को चुना है।
गुप्ता ने बताया कि ऐसे मामलों में यदि लड़की भयवश या अन्य कारणों से शोषण करने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज कराती है तो वैसी परिस्थिति में उस इलाके के या आसपास के लोग छापामारी में गए दंडाधिकारी या फिर स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग भी मुकदमा दर्ज करा सकते हैं।
पड़ोसी देश नेपाल के साथ खुली सीमा होने के कारण बिहार के रास्ते मानव तस्करी किए जाने के मामले आएदिन प्रकाश में आते रहते हैं। गृह विभाग ने मानव तस्करी रोकने के लिए तीन जिलों पटना, मुजफ्फरपुर और गया में विशेष इकाइयों का गठन किया है।
गृह विभाग ने ऐसे मामलों के प्रकाश में आने पर तत्परतापूर्वक कार्रवाई करने के लिए पुलिसकर्मियों और लोक अभियोजकों को भी प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया है। इसके तहत पटना, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, बेगूसराय, लखीसराय और मुंगेर के करीब पाँच हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
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