क्या ज्योतिष की मदद से रक्त कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज हो सकता है? शायद आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन गुजरात की ज्योतिषी निर्मला सोनी का दावा है कि यदि जातक की सही पत्रिका उपलब्ध हो तो ज्योतिष और आयुर्वेदिक औषधियों के समन्वय से गंभीर रोगों का इलाज संभव है।
पेस इंटर एस्ट्रोमेडिकल एसोसिएशन गुजरात की अध्यक्ष एवं भारतीय प्राच्य ज्योतिष शोध संस्थान की गुजरात प्रभारी श्रीमती सोनी को ज्योतिष के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए 11 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जा चुका है। आप ॐ आश्रम नरसिंहगढ़ के विद्यार्थियों को ज्योतिष की नि:शुल्क शिक्षा भी देती हैं। हाल ही में देवास (मध्यप्रदेश) में आयोजित ज्योतिष सम्मेलन में भाग लेने आईं श्रीमती सोनी से हमने ज्योतिष से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश-
एक ही समय, एक ही स्थान पर जन्मे जातकों की सामाजिक स्थिति एक जैसी क्यों नहीं होती? यह जरूरी नहीं कि एक ही स्थान और एक ही समय जन्मे जातकों की सामाजिक स्थति एक जैसी हो। इसके लिए व्यक्ति के पूर्व जन्म में संचित कर्म भी उत्तरदायी होते हैं। यदि व्यक्ति के पूर्व जन्म के कर्म अच्छे हैं, तो निश्चित ही उसे अगले जन्म में उनका लाभ मिलता है।
ज्योतिष विज्ञान है, गणित है अथवा ढकोसला है? ज्योतिष ढकोसला नहीं है, यह विज्ञानसम्मत शास्त्र है। इसका उद्देश्य जनता के बीच व्याप्त अंधविश्वास को दूर करना है तथा भविष्य की गतिविधियों से परिचित कराना है। ज्योतिष विज्ञान से भी पुराना विषय है। वर्तमान में भारत में ही नहीं, दुनिया के अन्य देशों में भी ज्योतिष को मान्यता मिली हुई है।
प्राचीन सुमेरियन सभ्यता में मिले 25000 वर्ष पुराने एक हड्डी के अवशेष पर भी ज्योतिष के चिह्न अंकित थे। श्रीमती सोनी ने ज्योतिष के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि स्विस मनोवैज्ञानिक कार्ल जुग और ब्रिटिश दार्शनिक फ्रांसिस बेकन भी ज्योतिष के प्रति अपनी आस्था प्रकट कर चुके हैं।
क्या कर्म के अनुसार हाथ की रेखाएँ बदलती रहती हैं? हाँ, कर्म और ग्रहों के प्रभाव के अनुसार थोड़े-थोड़े समय में व्यक्ति के हाथ की रेखाओं में भी बदलाव होता है। हालाँकि यह बदलाव आसानी से नहीं देखा जा सकता है। इसे विशेष ग्लास की मदद से ज्योतिष का जानकार व्यक्ति ही देख और समझ सकता है। गर्भ में पल रहे पाँच माह के शिशु के हाथ में रेखाओं का निर्माण हो जाता है।
ग्रहों का असर व्यक्ति पर कैसे होता है? जिस प्रकार सूर्य की किरणों का प्रभाव मानव जीवन पर होता है, उसी प्रकार अन्य ग्रहों का प्रभाव भी लोगों पर होता है। चंद्र और सूर्यग्रहण का असर भी प्राणियों पर प्रतिकूल ही होता है। सुमेरियन्स ने इस सूत्र का पता लगाया था कि व्यक्ति के जीवन में जो भी घटित होता, उस घटना का संबंध कहीं न कहीं नक्षत्रों से होता है।
उन्होंने कहा कि चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण ही समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है। समुद्र के जल में सोडियम, कैल्शियम और पोटेशियम होता है। समुद्र की तरह ही यह तत्व मानव शरीर में भी पाए जाते हैं, ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है कि चंद्र आदि ग्रहों का असर निश्चित ही मनुष्य पर पड़ता है। ग्रहों के प्रभाव से कोई नहीं बच पाता। प्रभु श्रीराम को ग्रहों के प्रभाव के कारण ही 14 वर्ष का वनवास भोगना पड़ा था।
क्या ज्योतिष की मदद से गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा सकता है? हाँ, ज्योतिष और जड़ी-बूटियों की मदद से ब्लड कैंसर और अन्य गंभीर रोगों का भी इलाज संभव है। जातक की पत्रिका में यदि चंद्र और मंगल कमजोर स्थिति में हों और शनि रोग, मृत्यु या व्यय के घर में बैठे हैं तो व्यक्ति को ब्लड कैंसर की पूरी-पूरी आशंका रहती है। कुंडली में कमजोर चंद्र व्हाइट ब्लड सेल्स को कम करता है तथा मंगल के कमजोर होने की स्थिति में रेड ब्लड सेल्स कम होते हैं।
उन्होंने कहा कि मैंने 100-150 ब्लड कैंसर के रोगियों का इलाज किया है, इनमें से ज्यादातर को डॉक्टर जवाब दे चुके थे। गेहूँ के जवारे, अनार का रस और अन्य जड़ी-बूटियों की मदद से इस तरह के रोगियों का उपचार किया जाता है।
समाज को ज्योतिष की क्यों जरूरत है? ज्योतिष समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। कुछ धंधेबाज और अल्प ज्ञान रखने वाले लोगों ने जरूर ज्योतिष को बदनाम किया है। कुछेक गलत भविष्यवाणियों के आधार पर ज्योतिष को झूठा नहीं ठहराया जा सकता है। जिस प्रकार किसी डॉक्टर के एकाध रोगी की मौत हो जाने पर उसकी उपयोगिता खत्म नहीं होती, उसी तरह एकाध गलत भविष्यवाणी से ज्योतिष शास्त्र की उपयोगिता भी खत्म नहीं हो जाती। शत प्रतिशत की अपेक्षा किसी भी क्षेत्र में नहीं की जा सकती।
इस विषय पर और शोध की जरूरत है। सरकार को भी चाहिए कि जिस तरह अन्य विषयों के लिए पुस्तकालय और प्रयोगशालाएँ बनाई जाती हैं, उसी तरह ज्योतिष को आगे बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए, ताकि इस विषय को लेकर लोगों में मौजूद गलत धारणाओं को बदला जा सके तथा समाज को झोलाछाप ज्योतिषियों से मुक्ति मिल सके। इसके लिए जनता को सहयोग करना होगा, ताकि लोगों को अल्पज्ञान के साथ ठग रहे ज्योतिषियों को बेनकाब किया जा सके।
भविष्यवाणियाँ, जो सच हुईं? यूँ तो मैं सार्वजनिक रूप से भविष्यवाणी करने में विश्वास नहीं करती, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव के समय मैंने कहा था कि श्रीमती प्रतिभा पाटिल ही अगली राष्ट्रपति होंगी। इसके अलावा कुछ ऐसी भविष्यवाणियाँ हैं, जिनके परिणाम से मुझे बिलकुल खुशी नहीं हुई। मैंने अपने नौकर प्रिंसबहादुर सिंह के बारे में घोषणा की थी कि सात दिन बाद उसकी मौत पानी में डूबने से हो सकती है। उसे मैंने पानी से दूर रहने की हिदायत भी थी, लेकिन एक व्यक्ति को डूबने से बचाने के दौरान उसकी मौत हो गई। नारायण खरे नामक एक डॉक्टर को भी मैंने दुर्घटना में घायल होने की भविष्यवाणी की थी, जो सच हुई।
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