हरियाणा की रेलवे पुलिस ने पटना में लावारिस लाशों की फोटो प्रदर्शनी लगाई है। ये लाशें उन्हें पिछले चार साल में रेलवे पटरियों या प्लेटफॉर्मों पर मिली हैं।
पुलिस का मानना है कि इस प्रदर्शनी में लगाई गई लगभग ढाई हजार तस्वीरों में ज्यादातर बिहारी मजदूरों की लाशें हैं, जो काम की तलाश में हरियाणा जाते हैं।
लावारिस लाशों की पहचान के लिए हरियाणा रेलवे पुलिस की यह प्रदर्शनी अपनी तरह की अनूठी पहल है। इस प्रदर्शनी में अपने प्रियजनों को तलाशने सैकड़ों लोग पहुँचे। प्रदर्शनी देखने पहुँचे लोगों में सुरेंद्र कुमार भी शामिल हैं।
अपनों की तलाश : सुरेंद्र को इन लाशों की तस्वीरों में हर नौजवान अपना भाई राजेश नजर आ रहा है और वे कह रहे हैं, हाँ यही है मेरा भाई, नहीं.. नहीं, यह है, हाँ यही है।
पटना के नजदीक मनेर के हल्दीछपरा के सुरेंद्र कुमार का 17 वर्षीय भाई राजेश कोई तीन साल पहले हरियाणा गया था, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। सुरेंद्र को उम्मीद है कि निश्चित तौर पर उनके भाई की लाश की तस्वीर की शिनाख्त हो जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सचाई का पता रिकॉर्ड देखने पर हो सकेगा।
अपने बिछुड़े रिश्तेदारों की खोज-खबर लेने आए लोग हरियाणा पुलिस की इस पहल को मानवीय संवेदनाओं के प्रति सजगता की बेहतरीन मिसाल बता रहे हैं।
हरियाणा में लापता हुए अपने बेटे की तलाश करने आए मोहनसिंह कहते हैं, भले ही मेरे बेटे की लाश की तस्वीर इसमें नहीं है, लेकिन हरियाणा पुलिस की यह पहल मानवता के प्रति संवेदनशीलता का उदाहरण है।
पुलिस की आशंका : हरियाणा रेल पुलिस के उपाधीक्षक रणधीरसिंह राणा कहते हैं, भले ही यह बात हैरानी की लगे कि पिछले चार साल में बिहार के ढाई हजार लोगों की मौत हरियाणा में हुई और इस पर किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन हमने सबूतों से निष्कर्ष निकाला है कि ये लाशें बिहार के मजदूरों की हो सकती हैं।
हम लाशों के करीब पड़े साक्ष्यों, कपड़ों और चेहरे और हुलिए के आधार पर इस नतीजे पर पहुँचे हैं। उनका कहना है कि खेती के मौसम में बिहार से हजारों की संख्या में मजदूर हरियाणा जाते हैं और भीड़भरी ट्रेनों से गिर जाने या अन्य दुर्घटनाओं में उनकी मौत हो जाती है।
राणा कहते हैं कि जिन लाशों की शिनाख्त हो जाएगी, उनके आश्रितों को रेलवे से मुआवजा दिलाने की कोशिश की जाएगी। हालाँकि लाशों की शिनाख्त करवाने के इस प्रयास में रेल मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है और हरियाणा रेल पुलिस ने खुद ही ये पहल की है।
पटना के रेलवे पुलिस अधीक्षक अजिताभ कुमार कहते हैं, हमने राज्य के तमाम थानों को सूचित कर इसमें सहयोग करने को कहा है। इस प्रदर्शनी को पटना के बाद छपरा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और कटिहार के रेलवे स्टेशनों पर लगाया जाएगा।
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