गुजरात चुनाव में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीत को लोकतंत्र की सबसे बड़ी कमजोरी बताते हुए सुप्रसिद्ध मानव अधिकार कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ ने कहा कि भाजपा की जीत का आशय कदापि यह नहीं है कि वहाँ सांप्रदायिक हिंसा के घाव भर गए हैं, बल्कि यह धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों द्वारा कड़ी चुनौती खड़ी नहीं करने का परिणाम है।
तीस्ता ने रविवार को यहाँ 'सांप्रदायिकता के खिलाफ साझा अभियान' सम्मेलन का समापन करते हुए कहा कि मोदी की जीत का मतलब यह नहीं है कि गुजरात सांप्रदायिक दंगों के घाव भर चुके हैं। वह कुछ ऐसा ही दावा कर रहे हैं। कम से कम उन्हें यह तो स्वीकार करना चाहिए कि ये घाव अभी हरे हैं। उन्होंने ने कहा कि गुजरात चुनाव में भाजपा की जीत वास्तव में भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी कमजोरी है। गुजरात में नरसंहार के बाद राज्य को विकास की प्रयोगशाला के रूप में दर्शाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि विधानसभा चुनाव में धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल भाजपा को कड़ी टक्कर देने में असफल रहे हैं।
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