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प. बंगाल में तीन साल में 444 तालाबंदी
दो लाख कामगार प्रभावित
माकपा नेतृत्व वाले वाममोर्चा की पश्चिम बंगाल सरकार जहाँ बहुराष्ट्रीय एवं निजी कंपनियों को राज्य में निवेश के लिए आकर्षित करने की भरसक कोशिश कर रही हैं, वहीं राज्य में पिछले तीन साल के दौरान देश में सर्वाधिक तालाबंदी की घटनाएँ हुई़, जिनके चलते न सिर्फ तीन करोड़ से अधिक कार्यदिवस बर्बाद हुए, बल्कि इससे 2 लाख से अधिक कामगारों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई।

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार वर्ष 2007 में देशभर में निजी क्षेत्र में तालाबंदी की कुल 145 घटनाएँ हुई, वहीं अकेले पश्चिम बंगाल में ऐसी 118 घटनाएँ हुई। इन घटनाओं के चलते देशभर में करीब 36.68 लाख कार्य दिवस नष्ट हुए इनमें से 24.14 लाख कार्य दिवस अकेले पश्चिम बंगाल में बर्बाद हुए।

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2005 में देश भर में निजी क्षेत्र में तालाबंदी की कुल 228 घटनाएँ हुई, जिनमें से अकेले पश्चिम बंगाल में 182 घटनाएँ हुई, जिसके कारण राज्य में एक करोड़ 58 लाख कार्यदिवस बर्बाद हुए जबकि 1 लाक 6 हजार 546 कामगार प्रभावित हुए।

इसी प्रकार वर्ष 2006 में पूरे देश में निजी क्षेत्र में तालाबंदी की 187 घटनाएँ हुई जिनमें से 144 घटनाएँ राज्य में हुई, जिसका प्रभाव 71995 कामगारों पर पड़ा और एक करोड़ 17 लाख कार्यदिवस जाया हुए।

सूत्रों के मुताबिक तालाबंदी की घटनाओं के मामले में दूसरे नबंर पर तमिलनाडु रहा। राज्य में पिछले साल निजी क्षेत्र में तालाबंदी की 11 घटनाएँ हुई जिसके चलते 2 लाख 64 हजार कार्य दिवस बर्बाद हुए तथा 3212 कामगारों की रोजी रोटी प्रभावित हुई।

तमिलनाडु में वर्ष 2005 में तालाबंदी की 13 घटनाएँ हुई जिससे 1731 कामगार प्रभावित हुए तथा एक लाख 25 हजार कार्य दिवस बर्बाद हुए।
इसी तरह राज्य में वर्ष 2006 में तालाबंदी की 13 घटनाएँ, हुई जिसके चलते दो लाख 99 हजार कार्य दिवस नष्ट हुए और 2349 कामगार प्रभावित हुए।

तालाबंदी की घटनाओं के मामले में पिछले साल आंध्रप्रदेश तीसरे और उत्तरप्रदेश चौथे स्थान पर रहे यहाँ तालाबंदी की क्रमश: पाँच और चार घटनाएँ हुई। आंध्रप्रदेश में इन घटनाओं के चलते जहां 12100 कामगार प्रभावित हुए वहीं एक लाख 90 हजार कार्य दिवस भी बर्बाद हुए। इस अवधि में उत्तरप्रदेश में 39 हजार कार्यदिवस नष्ट हुए।

पूरे देश में पिछले साल कुल 108 हड़तालें हुई। इनमें से सर्वाधिक हड़तालें तमिलनाडु में (37 निजी क्षेत्र में तथा 9 सार्वजनिक क्षेत्र) में हुई।
सार्वजनिक क्षेत्र में देशभर में 86 हड़तालें हुई, जिनमें सर्वाधिक 18 अकेले पश्चिम बंगाल में हुई। इसके चलते राज्य में 39 हजार कार्यदिवस नष्ट हुए तथा 31879 कामगार प्रभावित हुए।
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