बहुचर्चित ''तीसरी आजादी'' नामक सीडी प्रकरण से बसपा पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है। जिस तथाकथित राजनीतिक पार्टी का जन्म ही समाज में नफरत पैदा करने से हुआ हो, उससे और ज्यादा क्या आशा की जा सकती है। यह कहना है समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का।
उन्होंने कहा कि बसपा अपने जन्मकाल से ही भारतीय समाज के साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़कर अपनी राजनीतिक स्वार्थ सिद्वि करती रही है। बसपा का न कोई आर्थिक दर्शन है और न ही कोई कृषि नीति है। लोकतंत्र का यह दुःखद पहलू है कि सुश्री मायावती के रवैए में मुख्यमंत्री बनने के बाद भी सुधार नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा कुण्ठित मानसिकता का परिचय ही दिया है, तभी तो सामाजिक सौहार्द शान्ति एवं एकता बनाए रखना उनके सामाजिक एजेंडा में नहीं है, जबकि विकास की प्रक्रिया बिना सामाजिक सदभाव के प्रारम्भ ही नहीं हो सकती, इसीलिए सुश्री मायावती का विकास से भी कोई लेना-देना नहीं रहता।
सपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री सुश्री मायावती हमेशा की तरह इस बार भी सीबीआई को पत्र लिखकर अपनी सीधी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है, जबकि इस सीडी प्रकरण से उनकी पार्टी का संलिप्त होना प्रकाश में आ चुका है, जिसमें बसपा सांसद की सक्रिय भूमिका प्रथम द्ष्टया आरोपी की है। इसके पूर्व भी सुश्री मायावती ने गुर्दा काण्ड के आरोपी अधिकारी को बचाने के लिए सीबीआई से जाँच कराने सम्बन्धी पत्र लिखा था। न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए सम्बन्धित आरोपी को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त अथवा निष्कासन करना आवश्यक है। लगता है कि सुश्री मायावती का निष्पक्ष न्यायिक व्यवस्था में विश्वास नहीं है।
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि समाजवादी पार्टी की माँग है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम, सीता, कृष्ण, रामायण एवं महाभारत को दलित विरोधी बताने वाली बसपा द्वारा प्रायोजित सीडी के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाने की प्रभावी कार्यवाही करनी चाहिए। सुश्री मायावती द्वारा सीडी प्रकरण में आरोपी बसपा सांसद को पार्टी से बाहर करना चाहिए, अन्यथा सीबीआई को जाँच पत्र लिखना उनकी चालाकी का एक और उदाहरण माना जाएगा।
|