उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने 'तीसरी आजादी' नामक आपत्तिजनक सीडी के मामले की जाँच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया है।
प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए दोषी लोगों और संबंधित टीवी चैनल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। एफआईआर के बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को कहा कि मंगलवार को बस्ती जनपद में आपत्तिजनक सीडी के वितरण की सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत इस मामले में कठोर कार्रवाई करने और वितरित की गई सीडी को जब्त करने के आदेश बस्ती के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को दिए। उन्होंने कहा कि इस सीडी में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच द्वेष फैलाकर समाज को तोड़ने वाली सामग्री थी।
मायावती ने स्पष्ट किया कि उन्हें यह जानकारी मिली कि यह सीडी महाराष्ट्र में तैयार की गई थी और पिछले कई वर्षों से इसे वितरित किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में समय-समय पर कांग्रेस, भाजपा और शिवसेना की सरकार सत्ता में रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे स्पष्ट है कि इस प्रकार समाज को तोड़ने वाली इस फिल्म को बनाने और उसे बँटवाने में इन्हीं दलों का हाथ रहा है और सीडी प्रकरण उछलने से इन पार्टियों की असलियत का अब खुलासा हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभिसूचना तंत्र द्वारा उन्हें यह भी जानकारी मिली है कि यह सीडी इंटरनेट पर वर्ष 2006 में ही उपलब्ध हो गई थी और उस समय उत्तरप्रदेश में मुलायमसिंह यादव की सरकार सत्ता में थी, इसलिए यादव को बताना चाहिए कि समाज को बाँटने वाली वाली इस प्रकार की सीडी के बारे में उनकी सरकार ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
मायावती ने इस प्रकरण से अपनी पार्टी के सांसद लालमणि प्रसाद का नाम जोड़े जाने के संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रसाद बसपा में आने से पहले अम्बेडकर समाज सुधार समिति, हर्रैया बस्ती के सदस्य थे, लेकिन बसपा में शामिल होने के बाद इस संस्था से उनका अब कोई संबंध नहीं है।
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