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इस साल मिलेगा मुंबई को वरदान
21वीं सदी में यदि सबसे कीमती कोई चीज है तो वह समय है और समय को साधने के लिए ही सारी कवायद है। सारी दुनिया समय को साधने में लगी है और साधन जुटा रही है। हर चीज को इंसान आसान बनाने में लगा है। सबसे पहली जरूरत है दैनंदिनी जीवन को सरल बनाने की।

देश के इस महानगर में समय को लेकर काफी आपाधापी रहती है और इसी को साधने के लिए इस समय यहाँ पर दो बड़ी परियोजनाएँ चल रही हैं। एक है मेट्रो ट्रेन और दूसरा है बांद्रा-वर्ली लिंक परियोजना। यदि मेट्रो ट्रेन 20 हजार करो़ड़ रु. की है तो बांद्रा वर्ली परियोजना भी 13,000 करो़ड़ रु. की है।

यानी मुंबई के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में जो समय लगता है, वह घटकर 35 मिनट रह जाएगा। व्यस्ततम समय में भी आठ लेन में बनने वाला यह प्रोजेक्ट 35 मिनट में बांद्रा से वर्ली ले जाएगा। पुल के दोनों ओर केबल लगी होगी। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम की इस परियोजना को हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी तैयार कर रही है। यह दिसंबर 2008 तक पूरा होने की संभावना है। वर्तमान में माहिम कॉजवे है, जो पश्चिमी उपनगर को मुंबई से जोड़ता है।

परंतु व्यस्ततम समय में यानी हर दिन सुबह 9 बजे और शाम 5 बजे के करीब यहाँ पर काफी आपाधापी हो जाती है। गाड़ियाँ एक बार ट्रैफिक जाम में फँसी तो करीब 3 घंटे से पहले निकलना मुश्किल हो जाता है। माहिम से वर्ली तक की दूरी आठ किमी की है।

वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और बांद्रा का स्वामी विवेकानंद मार्ग जहाँ मिलता है, वहाँ से यह परियोजना शुरू होती है। वर्ली पर यह अंत में मिलता है। पूरा मार्ग 5.6 किमी का है। (नईदुनिया)
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