मन में हिम्मत और लगन होती है तो ईश्वर भी आपकी मदद करता है। यह बात 20 वर्षीय मिथिलेश वर्मा नामक लड़की पर बिलकुल सटीक साबित होती है क्योंकि शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण बीमार मिथिलेश ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ परीक्षा की तैयारी ही नही कर रही है बल्कि उसने अपने दो पेपर सफलता पूर्वक दे भी दिए हैं।
शहर के बिरहना रोड पर ज्वैलरी का काम करने वाले जीके वर्मा की सबसे बड़ी बेटी मिथिलेश एसएन सेन डिग्री कालेज में बीए सेकंड ईयर की छात्रा है तथा मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र और अँगरेजी साहित्य उसके विषय हैं। वह अपने घर पर ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर परीक्षा की तैयारी ही नहीं कर रही बल्कि ऑक्सीजन का सिलिंडर लगाए परीक्षा भी दे चुकी है।
मिथिलेश ने आज कहा कि कि मैं अपनी बीमारी के कारण जिंदा रहूँ या न रहूँ लेकिन जब तक मेरे शरीर में जान है मैं पढ़ती रहूँगी और परीक्षा देती रहूँगी। ऑक्सीजन सिलिंडर क्या अगर मुझे बिस्तर पर लेटकर परीक्षा देनी पड़ी तो दूँगी।
मिथिलेश के पिता जीके वर्मा ने बताया कि मिथिलेश को करीब एक साल पहले निमोनिया हो गया था जिस कारण उसके फेफड़ों में संक्रमण हो गया था। उसे कानपुर के डॉक्टरों को दिखाने के बाद दिल्ली के कई अस्पतालों में दिखाया। उन्होंने बताया कि दिल्ली के इलाज के बाद फेफड़ों ने काम तो करना शुरू कर दिया, लेकिन अभी पूरी तरह से ठीक न हो पाने के कारण डॉक्टरों ने मिथिलेश को चौबीसों घंटे डाक्टरों लगाने के निर्देश दिए हैं। पिछले कई माह से वह आक्सीजन सिलिंडर के सहारे ही जी रही है।
वर्मा के अनुसार इस बीच मिथिलेश की बीए सेकंड ईयर की परीक्षा आ गई और वह जिद करने लगी कि मैं परीक्षा दूँगी, तब कॉलेज प्रशासन से बात करके उसे सिलिंडर के साथ परीक्षा देने की इजाजत दिलाई गई।
उन्होंने बताया कि परीक्षा के दिन सिलिंडर के साथ वह मिथिलेश के कॉलेज में जाते हैं और जब तक परीक्षा होती है कॉलेज के बाहर बैठे रहते हैं।
मिथिलेश ने बताया कि वह आक्सीजन सिलिंडर के साथ मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र की परीक्षा दे चुकी है। अब 19 मार्च को अँगरेजी साहित्य का पेपर है, वह उसकी घर पर तैयारी कर रही है।
ऑक्सीजन की नली के साथ पढ़ने में कोई परेशानी नहीं होती है, इस पर एक फीकी-सी मुस्कराहट के साथ मिथिलेश कहती है कि जब भगवान ऐसा चाहता है तो मैं क्या कर सकती हूँ। मैं तो अपनी पूरी लगन से परीक्षा की तैयारी कर रही हूँ।
क्या तुम्हें उम्मीद है कि तुम अच्छे नम्बरों से पास हो जाओगी, इस पर मिथिलेश कहती है कि क्यों नहीं, मैंने बिस्तर पर ही पूरी परीक्षा की तैयारी की है। बीमार हूँ तो क्या हुआ मन में लगन और आत्मविश्वास तो है न। मुझे जरूर अच्छे नंबर मिलेंगे। मिथिलेश के इस लगन और जज्बे को सलाम।
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