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हजारों 'बब्बू' की बड़ी टीचर
-संजय पटेल (पूर्व छात्र, बाल विनय मंदिर)
तू क्या कर रहा हे रे बब्बू। मिलता नहीं। अब हम तो बुड्ढा हो गया, कभी याद कर लिया कर रे बब्बू। दिलीप चिंचालकर हो, शिवसिंह मेहता, सुजाता भार्गव या नितिन मेहता, बड़ी टीचर अपने तमाम विद्यार्थियों से जब मिलतीं तो इसी बब्बू संबोधन से अपने लाड़लों को मालामाल कर देतीं।

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कत्थई रंग की सूती सा़ड़ी और गहरे पीले रंग का स्वेटर बड़ी टीचर का 'सिग्नेचर' परिधान था। डॉ. एसके मुखर्जी और श्रीमती मैत्रेयी पद्मनाभन अपने वाहनों से भी पहचाने जाते थे इस शहर में।

छप्पन दुकान पर काली फिएट खड़ी हो तो पता लग जाता था कि अम्मा आज बूँदी के लड्डू खरीदने आई हुई हैं। संगीत की करामाती सूझ अम्मा को ऐसी थी कि मजाल है एक सुर या ताल यहाँ-वहाँ हो जाए। डागर बंधुओं से ध्रुपद धमार के गंडाबंद शागिर्द रहे पद्मनाभन दम्पति सत्तर के दशक तक आबाद रहे अभिनव कला समाज के संगीत जलसों के स्थायी श्रोता होते थे।

पद्मनाभन के अलावा दशोत्तर दम्पति भी इन महफिलों की चर्चित जो़ड़ी हुआ करती थी। शिक्षा जगत में बाल विनय मंदिर, ग्रेसिम विद्या मंदिर (नागदा), चोइथराम स्कूल, श्री सत्यसाँई विद्या विहार और पीएम अग्रवाल स्कूल उनके ईमानदार कामों के स्मारक ही कहे जाने चाहिए।

पुत्र महावीर चक्र विजेता 1971 की पाकिस्तान लड़ाई के बाद पालम हवाई अड्डे से एक प्रशिक्षण फ्लाइट में दिवंगत हुए थे। एक अखबारनवीस ने पुत्र खोने पर अम्मा से प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उनका जवाब एक वीर प्रसूता का जवाब था। अम्मा बोलीं- काश! वह लड़ाई में मारा जाता तो शहीद कहलाता। बच्चों के लिए तो वे वात्सल्य की मूर्ति थीं।

साकेत के घर में उनका कक्ष बच्चों की नोटबुक्स एवं किताबों से पटा पड़ा रहता था। बहुत कम लोगों को ज्ञात है कि वे मूलतः थियोसॉफिकल मूवमेंट से प्रेरित रहीं और एनी बेसेंट को अपनी प्रेरणा मानती रहीं। वे मानती थीं कि बच्चे देश की असल पूँजी होते हैं।

अपनी माँ खोने पर कोई कितना भावुक होता है या रोता है, यह नितांत व्यक्तिगत अनुभूति का विषय है, लेकिन बड़ी टीचर के रूप में अपनी माँ तलाशने वाले हजारों 'बब्बुओं' की आँखें आज पनीली हुई होंगी, यह निर्विवाद सत्य है। इंदौर में जब-जब भी शिक्षा में मूल्यों की बात चलेगी, बड़ी टीचर शिद्दत से याद की जाती रहेंगी।
अब नहीं लगेगी बड़ी टीचर की क्लास
ऐसा महान व्यक्तित्व अब नहीं मिलेगा
गुरु की सीख खत्म नहीं होती
हम छात्र बड़ी टीचर के
देश सेवा में समर्पित पद्मनाभन परिवार
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