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अब नहीं लगेगी बड़ी टीचर की क्लास
मैत्रेयी पद्मनाभन नहीं रहीं, नम आँखों से अंतिम बिदाई
बड़ी टीचर की क्लास अब नहीं लगेगी। प्रख्यात शिक्षिका तथा शिक्षाविद् श्रीमती मैत्रेयी पद्मनाभन का सोमवार तड़के यहाँ निधन हो गया। वे 94 वर्ष की थीं। सैकड़ों विद्यार्थियों और प्रशंसकों ने नम आँखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। तिलकनगर मुक्तिधाम पर बेटे अशोक और कृष्णा ने चिता को मुखाग्नि दी।

शिक्षा जगत में 'बड़ी टीचर' के नाम से लोकप्रिय श्रीमती पद्मनाभन का जन्म 24 जनवरी 1914 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था। बच्चों की शिक्षा और शिक्षा में नैतिक मूल्यों की स्थापना के कार्य में वे अंत तक जुटी रहीं।

वे मूलतः थियोसॉफिकल आंदोलन से प्रेरित थीं और एनी बेसेंट को अपनी प्रेरणा मानती थीं। उन्होंने मैडम मांटेसरी के सान्न‍िध्य में भी कार्य किया। वे बच्चों को देश की असल पूँजी मानती थीं। 1966 में बड़ी टीचर को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बच्चों के लिए तो वे वात्सल्य की मूर्ति थीं।

शासकीय सेवा से निवृत्त होने के बाद भी वे आजीवन शिक्षा जगत में सक्रिय रहीं। इंदौर के कई निजी स्कूलों को सँवारा। साकेत नगर स्थित उनका घर बच्चों की नोट बुक, किताबों आदि से पटा रहता था।

उनके एक बेटे पी. गौतम का सेना में विंग कमांडर रहते दुर्घटना में निधन हो गया था। श्रीमती पद्मनाभन पिछले करीब एक पखवाड़े से बीमार थीं । सोमवार तड़के 6.30 बजे उन्होंने अंतिम साँस ली।

तिलक नगर मुक्तिधाम पर शोकसभा में वरिष्ठ पत्रकार श्री अभय छजलानी एवं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सर्वश्री सरोजकुमार, विट्ठल त्रिवेदी, गोपालदास मित्तल, डॉ. सेठी, डॉ. बीके पासी, सुधीर एरन सहित अनेक व्यक्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
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