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भारतीय महिलाएँ किसी से कम नहीं
भारतीय रेल में पटरी बदलना हो या टिकट काटना या गेट पर बेटिकट यात्रियों को दबोचना या स्टेशन की सुरक्षा, महिला रेलकर्मियों ने अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पटना से मात्र 15 किलोमीटर दूर हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर सभी काम बखूबी अंजाम देकर साबित कर दिखाया कि महिलाएँ किसी से कम नहीं हैं।

भारतीय रेल के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ, जब किसी महत्वपूर्ण जंक्शन रेलवे स्टेशन के चप्पे-चप्पे का काम पूरी तरह से महिलाओं के जिम्मे सौंप दिया गया।

पूर्व मध्य रेलवे के सोनपुर रेल मंडल के तहत हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर महिलाओं ने सहायक स्टेशन मास्टर, ट्रैफिक पोर्टर, आरक्षण, टिकट चेकिंग, रेल सुरक्षा सहित सभी काम अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पुरुषों की भागीदारी के बगैर बखूबी से अंजाम दिया। इस दौरान करीब 40 ट्रेनें रेलवे स्टेशन से गुजरी और उसमें एक ट्रेन ही मात्र 35 मिनट विलंब से चली और वह भी पीछे से ही विलंब से आ रही थी।

सोनपुर रेल मंडल के प्रबंधक प्रमोद कुमार ने बताया कि महिलाओं की क्षमता और समाज में उनकी उपयोगिता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से पूरे स्टेशन के चप्पे चप्पे की जिम्मेदारी सुबह आठ बजे से लेकर अपराह्न चार बजे तक महिलाओं को सौंप दी गई थी और पुरुषों को हटाकर बाद वाली शिफ्ट में लगा दिया गया था।

पूरे स्टेशन पर किसी भी पुरुषकर्मी को नहीं देखकर रेल यात्री भी भौचक थे, लेकिन इससे महिलाओं की कार्यशैली पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था हालाँकि किसी भी महिला टिकट चेकर के हत्थे बेटिकट यात्री नहीं चढ़ा।

महिलाओं में ट्रैफिक पोर्टर के रुप में आभा देवी, गिन्नी कुमारी, आशा देवी और रामपरी देवी जिस कार्यकुशलता और मजबूती से खड़ाक-खड़ाक हैण्डिल को दबाती हुई ट्रेन की पटरियों को बदल रही थीं और उस पर से ट्रेन तेज गति से भाग रही थी वह देखते ही बन रहा था।

ट्रेन परिचालन में संभवत: यह कार्य सबसे कठिन होता है, जब ट्रेन को एक रुट से दूसरे रुट में भेजने के लिए ट्रेन की पटरी बदल दी जाती है और उस पर से ट्रेन सनसनाती हुई दूसरी रुट को पकड़ लेती है लेकिन ऐसा करते समय महिलाओं का न तो हाथ काँप रहा था और न ही उनमें आत्मविश्वास की कोई कमी दिखाई दे रही थी।

सहायक रेलवे स्टेशन मास्टर के रुप में जहाँ रेवती कुमारी और कुसुमी कुमार अगले और पिछले रेलवे स्टेशनों के साथ लगातार तालमेल कर आने जाने वाली ट्रेनों को बखूबी नियंत्रित कर रही थीं, वहीं रेलवे स्टेशन के निकास द्वार पर पूनम कुमारी, रीतासिंह बेणीनूर, अंजली टोपनो और पूनमसिंह टिकट यात्रियों की टिकट चेकिंग कर रही थीं।

मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि महिलाओं ने बाद में विचारों के आदान-प्रदान के क्रम में यह स्वीकार किया कि रेलवे की नौकरी में रात की डयूटी में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर उस समय जब पुरुष यात्रियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

रेलवे स्टेशन पर बुकिंग क्लर्क के रुप में डिंपल राय, सदा निशाद, वंदिता शर्मा, रुचि रानी, चंद्रा चंदा, आरती कुमारी और अनीता कुमारी जहाँ सैकड़ों यात्रियों के लिए धड़ाधड़ टिकट काट रही थीं और बिना किसी धक्का-मुक्की के लोगों को टिकट मिल रहा था, वहीं दूसरी तरफ पंक्ति बनाए रखने ठीक से टिकट लेने धक्का-मुक्की नहीं करने की निगरानी रेल सुरक्षा बल के जवान के रुप में शशिबाला सिंह और किरण कुमारी कर रही थीं।

शशिबाला और किरण बीच बीच में स्टेशन के अन्य हिस्सों में भी बडी मुस्तैदी से चक्कर लगाती हुई देखी जा रही थी जो सीधे सादे ग्रामीण यात्रियों के लिए कौतुहल तो था ही साथ ही आशंका भी थी कि शायद आज कुछ विशेष है इसीलिए वे सभी बडे़ करीने से टिकट खरीदते हुए देखे गए।

पूर्व मध्य रेलवे के उप महाप्रबंधक सह मुख्य जनसंपर्क अधिकारी आरके चंद्रा ने बताया कि महिलाओं को रेलवे की नौकरियों में अधिक से अधिक आकर्षित करने और महिला सशक्तिकरण को प्रदर्शित करने के उददेश्य से इस नायाब कार्यक्रम का प्रयोग किया गया, जो जबर्दस्त सफल रहा।

उन्होंने कहा कि इससे अन्य महिलाकर्मियों को बल मिलेगा और साथ साथ देश के सबसे बडे इस सार्वजनिक उपक्रम में काम करने के लिए महिलाएँ आकर्षित होंगी तथा उनका इरादा मजबूत होगा।

आरक्षण काउंटर पर किरण कुमारी, सविता कुमारी और अर्चना कुमारी कम्प्यूटर से लोगों का तेज गति से आरक्षण करते हुए देखी गईं जबकि रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार पर गेटमैन के रुप में बबिता कुमारी, विद्यावती प्रसाद और मीरा देवी को यात्रियों को दिशा निर्देश देते देखा गया।

पूछताछ काउंटर पर भी वहीं नजारा था। महिलाएँ अपने आंतरिक तकनीकी विभाग से जानकारी हासिल कर ट्रेनों के बारे में लोगों को सूचना मुहैया करा रही थी और साथ साथ ट्रेनों के आने जाने के बारे में प्रसारण भी कर रही थीं।

रेल मंडल प्रबंधक ने कहा कि महिलाओं ने अपने बलबूते पर जिस बखूबी से पूरे आठ घंटे तक परिचालन से लेकर प्रबंधन तक के काम को अंजाम दिया उससे महिलाओं का हौसला और अधिक बढा है तथा उनमें आत्मविश्वास तथा संतुष्टि भी दिखाई दे रही थी।

इस प्रयोग में मंडल के ही दूसरे स्टेशनों से महिलाकर्मियों को लाकर तैनात किया गया था। रेलवे द्वारा महिलाओं को पुरस्कृत भी किया गया ताकि उनकी हौसला आफजाई होती रहे।
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