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एशियाई शेर म.प्र. की शोभा नहीं बन सके
मध्यप्रदेश और गुजरात में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद गुजरात सरकार के अडि़यल रवैये के चलते श्योपुर जिले के कूनो पालपुर अभयारण्य में गुजरात से एशियाई सिंहों को लाने का सरकार का सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार गुजरात और मध्यप्रदेश में भाजपा की ही सरकार है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा पिछले तीन सालों से कूनो पालपुर अभयारण्य में एशियाई शेरों को लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बावजूद फिलहाल यह कोशिशें परवान चढ़ती नजर नहीं आ रही हैं।

एशियाई शेरों को मध्यप्रदेश लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए सूत्रों ने बताया कि एशियाई शेरों को मध्यप्रदेश लाने के लिए 10 जनवरी 2005 को राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में भाग लेने के लिए आए केन्द्र सरकार के वन महानिरीक्षक (वन्य प्राणी) आर.बी. लाल से शेरों के पुनर्वास में प्रगति के संबंध में अनुरोध किया गया था और उन्होंने इस बारे में गुजरात सरकार से विचार-विमर्श करने का आश्वासन दिया था।

सूत्रों के अनुसार इस दिशा में कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने पर राज्य सरकार ने एक बार फिर 24 मार्च 2005 को भारत शासन के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) तथा वन महानिरीक्षक (वन्य प्राणी) को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया गया कि वे गुजरात को सिंह देने के लिए राजी करें।

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के भोपाल आगमन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने भी उनसे इस मामले में लंबी बातचीत की और मोदी ने इस मामले पर अपने राज्य के वन अधिकारियों से चर्चा कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया, लेकिन गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी।

इन सभी मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी पीछे नहीं रहे तथा उन्होंने पाँच जुलाई 2006 को केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखकर इस दिशा में कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया।

सूत्रों ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा भी इस दिशा में पर्याप्त रुचि ली गई तथा वन एवं पर्यावरण के सचिव ने 11 से 13 जनवरी 2007 के मध्य कूनो अभयारण्य का भ्रमण करने के बाद मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक गुजरात मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक मध्यप्रदेश सदस्य सचिव टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी तथा क्षेत्र संचालक कूनो के साथ भी विचार-विमर्श किया गया।

मध्यप्रदेश और केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा किए गए इन सभी प्रयासों के बावजूद गुजरात सरकार द्वारा आज तक कूनो पालपुर अभयारण्य में सिंहों को भेजने की संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।

एक प्रश्न के उत्तर में सूत्रों ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता, जबकि इस मामले में अंतिम निर्णय केन्द्र एवं गुजरात सरकार को ही लेना है। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि कूनो पालपुर में एशियाई सिंह आ जाते हैं तो न केवल राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा।
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