पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान करोड़ों रुपए के घोटालों में दोषी, निलंबन के पश्चात लोकसेवा आयोग की सिफारिश पर बर्खास्त हुए उत्तरप्रदेश जल निगम के कार्यवाहक प्रबंधन निदेशक अतुल कृष्णा को मौजूदा सरकार ने पुनः निगम का नया एमडी बना दिया, जिससे नया विवाद उठ खडा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि नोएडा में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की जाँच तत्कालीन सरकार ने विभिन्न एजेंसियों से कराई थी। इस जाँच में अतुल कृष्णा दोषी पाए गए थे। उन्हें निलम्बित कर दिया था। लोकसेवा आयोग ने इस घोटाले को बहुत गम्भीरता से लिया था और अतुल कृष्णा को बर्खास्त करने को कहा था।
लोकसेवा आयोग के निर्णय पर 5 मई, 2007 को प्रदेश के तत्कालीन नगर विकास मंत्री एवं जलनिगम के अध्यक्ष मो. आजम खाँ ने बर्खास्तगी की संस्तुति कर मामले को मुख्यमंत्री के सामने भेज दिया था, जिस पर मुलायमसिंह यादव ने बर्खास्तगी आदेश दे दिए थे। इसी बीच मौजूदा सरकार सत्ता में आ गई और अतुल कृष्णा ने पूर्ववर्ती सरकार के निर्णय को बदलवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया।
कृष्णा पर आरोप है कि सी एंड डीएस यूनिट-27 एवं 46 नोएडा में उन्होंने अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वाह न कर सी एंड डीएस में प्रचलित उप्र राजकीय निर्माण निगम मैन्युअल में दिए गए प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया, कम सेंटेज पर कार्य करवाने, निजी हित में निर्माण कार्यों को सबलेटिंग कर अनियमित रूप से एमओयू के माध्यम से कार्य करवाने, पीसीआर के माध्यम से निर्माण कार्यों हेतु अनुबंध बनवाने, अधीनस्थों पर शिथिल नियंत्रण रखने और उनके द्वारा की गई गंभीर अनियमितताओं को अनदेखा कर विभाग को आर्थिक क्षति पहुँचाने और विभाग की छवि धूमिल करने का काम किया। नोएडा मामले में महालेखाकार ने अनियमितताएँ उद्घाटित कर कहा कि अतुल कृष्णा ने बिना निविदा के 185.11 करोड़ का अनुबंध ठेकेदारों से किया, सेंटेज चार्जों की दरों में अनियमित छूट देकर 15.058 करोड़ की क्षति पहुँचाई तथा जमानत की धनराशि कम जमा कराकर अनियमित रूप से ठेकेदारों को 14.81 करोड़ का लाभ पहुँचाया और उसके परिप्रेक्ष्य में स्टाम्प ड्यूटी के रूप 1.29 करोड़ रुपए की क्षति पहुँचाई गई।
शासन ने 29 मार्च, 2006 को कृष्णा पर आरोप निर्धारित कर दिए थे तथा लोकसेवा आयोग उप्र ने 14 सितम्बर, 2006 को अतुल कृष्णा को उप्र जलनिगम की सेवा से पदच्युत करने की सिफारिश राज्य सरकार से की, जिस पर सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था।
बसपा की सरकार बनते ही अतुल कृष्णा सक्रिय हो गए और नगर विकास मंत्री एवं जल निगम के अध्यक्ष नकुल दुबे ने घोटालों पर पर्दा डालते हुए भ्रष्टाचार के दलदल में सिर तक धँसे अतुल कृष्णा को जल निगम का आखिरकार नया एमडी बनाकर सरकार की मंशा जाहिर कर ही दी।
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