आदिवासियों के विकास पर झारखंड से राष्ट्रपति को नियमित रूप से रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है। राजभवन ने इसे गंभीरता से लिया। राजभवन ने मुख्य सचिव को एक पत्र भेजकर राष्ट्रपति को समय-समय पर दी जाने वाली रिपोर्ट के लिए अविलंब जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
राज्यपाल के प्रधान सचिव अमित खरे ने मुख्य सचिव एके बसु को लिखे पत्र में कहा है कि रिमाइंडर बावजूद कल्याण विभाग, समाज कल्याण एवं नगर विकास विभाग द्वारा पिछले कई माह से रिपोर्ट नहीं दी गई है। पाँचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल राज्य में आदिवासियों के कस्टोडियन होते हैं। इसके लिए बाकायदा राज्य में जनजातीय परामर्शदाता परिषद बनाई गई है।
हर महीने प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाती है। सरकार आदिवासियों के विकास के लिए जो धन उपलब्ध कराती है, उसका कितना उपयोग हुआ, आदिवासियों की जीवन-दशा कैसी है, इस विषय पर जनजातीय बहुल राज्यों के राज्यपाल सीधे केंद्र को रिपोर्ट सौंपते हैं।
राज्य में टीएसी की बैठक हुए छः महीने से ऊपर हो गए हैं, जबकि नियम के मुताबिक वर्ष में इसकी दो बार बैठक अनिवार्य है। दुखद यह है कि पिछली बैठक में लिए गए फैसले पर अभी तक विभिन्न विभागों ने कार्रवाई भी नहीं की है। मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों को चार मार्च तक राजभवन को रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
|