मध्यप्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में 1999-2000 से 2006-07 के बीच सात साल के दौरान (स्थिर भावों पर) 3.36 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह प्रचलित भावों के आधार पर 1999-2000 में प्रति व्यक्ति आय 12 हजार 384 रुपए थी, जो वर्ष 2006-07 में बढ़कर 16 हजार 578 रुपए (त्वरित) हो गई। यह 33.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। मध्यप्रदेश सरकार के वर्ष 2007-08 के आर्थिक सर्वेक्षण में राज्य की सामाजिक, आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा गया है कि सात साल की इस अवधि के दौरान स्थिर भावों पर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वार्षिक वृद्धि दर 3.36 प्रतिशत रही। इसी अवधि में प्रचलित भावों के आधार प्रति व्यक्ति आय में वर्ष 1999-2000 के मुकाबले वर्ष 2006-2007 में 33.87 प्रतिशत की वृद्धि आँकी गई है।
राज्य के पूँजीगत आयोजना व्यय में वर्ष 2003-04 से निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसके तहत वर्ष 2002-03 से वर्ष 2006-07 की अवधि में पूँजीगत आयोजना व्यय में 17.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
आलोच्य अवधि में बैंकों द्वारा कृषि क्षेत्र को दिए अग्रिम में 20.78 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर रही। प्रदेश के किसानों को उनकी साख सुविधा की सुगमता से पूर्ति सुनिश्चित करने हेतु वर्ष 2006-07 में बैंकों द्वारा 4.39 लाख क्रेडिट कार्ड किसानों को वितरित किए गए तथा वित्तीय वर्ष 2007-08 के सितंबर तक 2.47 लाख क्रेडिट कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।
राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रदेश में 20.48 हजार उचित मूल्य की दुकानें संचालित हैं जिसमें 16.57 हजार दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को 44.52 लाख राशन कार्ड तथा अन्त्योदय अन्न योजना के अंतर्गत अतिगरीब परिवारों को 15.74 लाख पीले राशन कार्ड राज्य सरकार ने देकर इनके लिए सस्ते खाद्यान्न की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वर्ष 2007-2008 का मानसून प्रदेश में बहुत अच्छा नहीं रहा। मानसून अवधि के प्रथम दो माह में ही केवल वर्षा की स्थिति अच्छी रही, लेकिन शेष दो माह में वर्षा कम होने से प्रदेश में सामान्य औसत से कम वर्षा दर्ज की गई जिसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन पर मिश्रित प्रभाव पड़ा है।
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