बिहार को विश्व के नक्शे पर स्थापित करने वाले केसरिया स्थित दुनिया के सबसे ऊँचे बौद्ध स्तूप का अस्तित्व केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की उपेक्षा से खतरे में पड़ गया है।
केसरिया की प्रखंड प्रमुख सुमित्रा कुमारी यादव ने बताया बारिश के मौसम में स्तूप के अंदर जल जमाव की स्थिति पैदा हो जाती है। जल जमाव और गड्ढे में जल भराव की स्थिति से दुनिया के इस सबसे ऊँचे बौद्ध स्तूप का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
प्रखंड प्रमुख ने बताया कि पूरा उत्तर बिहार बाढ़ग्रस्त इलाका है। निचली भूमि होने के कारण क्षेत्र में साधारण बारिश से भी स्थिति नारकीय हो जाती है।
उन्होंने बताया इसकी खोज के समय जो उत्खनन कार्य हुआ था उसके बाद इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। भारतीय प्राचीनता के इस गवाह का संरक्षण करने वाला भी कोई नहीं है। यादव ने बताया लगभग छह सात साल पहले इसकी एक तिहाई खुदाई की गई थी। उसके बाद से इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि इसे बुद्ध सर्किट से जोड़ने की आवश्यकता है जिसके लिए गंडक नदी पर पुल बनाना अनिवार्य है। इसके बाद इस पुल से होने वाली कमाई से ही स्तूप का पूरा विकास हो जाएगा।
|