कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को रायपुर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएस तिड़के ने चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में प्रथम दृष्टया ही आरोप नहीं बनने के कारण आरोप मुक्त कर दिया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तिड़के ने खचाखच भरी अदालत में जोगी की मौजूदगी में उनके विरुद्ध लगाए गए सभी आरोपों को प्रथम दृष्टया साबित नहीं होने पर मुक्त कर दिया है। इस मामले में सुनवाई न्यायाधीश ने पिछले पखवाड़े ही पूरी कर ली थी और जोगी को आज की तिथि पर न्यायालय में पेश होने का आदेश दिया था।
जोगी को रामअवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी के द्वारा दायर मामले के आधार पर पिछले वर्ष गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही इसका पता चला। जोगी को राजनांदगाँव उपचुनाव के दौरान आनन-फानन में गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी की जून 2003 में राजधानी हत्या हो गई थी। इस मामले में एक प्राथमिकी पुलिस ने तथा दूसरी मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने दर्ज करवाई थी। मृतक के पुत्र ने जोगी एवं उनके पुत्र को आरोपी बनाया था। जोगी उस समय राज्य के मुख्यमंत्री थे।
राज्य में दिसंबर 2003 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद इस मामले की जाँच रमन सरकार ने सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने बाद में मामले की विवेचना कर जोगी के पुत्र अमित एवं तीन पुलिस अधिकारियों समेत 31 लोगों को आरोपी बनाया।
जोगी के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं होने के कारण सीबीआई ने उनसे प्रारंभिक पूछताछ तक नहीं की थी। मृतक के पुत्र ने इस बीच पिछले वर्ष अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यभामा दुबे की अदालत में वर्ष 2003 में दर्ज प्राथमिकी का हवाला देते हुए जोगी के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक निजी वाद हत्या, षड्यंत्र, आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में दायर किया। इस मामले में जोगी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया।
अपर सत्र न्यायधीश तिड़के को बाद में इस मामले की सुनवाई भी सौंप दी गई। तिड़के ने ही इस मामले की सीबीआई द्वारा प्रस्तुत मामले की सुनवाई की थी जिसमें जोगी के पुत्र अमित दोषमुक्त हो गए थे पर तीन पुलिस अधिकारियों समेत 30 दोषी करार दिए गए थे।
मामले की आरोप निर्धारण के लिए अंतिम सुनवाई गत 15 फरवरी को हुई थी जिसमें वादी के अधिवक्ता जेपी पाण्डेय ने परिवाद-पत्र के साथ ही साक्ष्य की सूची न्यायालय में प्रस्तुत करने का उल्लेख किया था, जबकि जोगी की तरफ से उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्रसिंह ने पक्ष रखा था।
न्यायधीश ने मामले की सुनवाई पूरी कर जोगी को न्यायालय में शनिवार को पेश होने का आदेश दिया था। जोगी सुबह 11 बजे न्यायालय में पेश हुए पर न्यायाधीश ने बाद में एक बजे उन्हें पेश होने का आदेश दिया। जब वह दूसरी बार पेश हुए तो न्यायाधीश ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि इस मामले में जोगी पर प्रथम दृष्टया ही आरोप नहीं बनता।
उन्होंने मामले को आगे चलाने के अयोग्य मानते हुए जोगी को उनके विरुद्ध निजी वाद में लगाए गए सभी आरोपों को मुक्त कर दिया।
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