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यूपी में शशांक शेखर का इस्तीफा
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उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने नॉन कैडर आईएएस अधिकारी शशांक शेखर सिंह को प्रदेश का कैबिनेट सचिव बनाकर सचिवालय का शासकीय प्रधान और राज्य योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाकर उन्हे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने से उठे विवाद पर विराम लगाते हुए शनिवार को बताया कि सिंह ने सचिवालय के शासकीय प्रधान के पद से इस्तीफा दे दिया है और मंत्री पद का दर्जा भी छोड़ दिया है मगर वे कैबिनेट सचिव के पद पर बने रहेंगे।

मुख्यमंत्री मायावती ने विधानसभा में घोषणा की कि सिंह ने शुक्रवार को राज्य के कैबिनेट सचिव एवं उपाध्यक्ष योजना आयोग के पद से त्याग पत्र उन्हें सौंप दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शशांक अब राज्य के प्रशासनिक मुखिया नही रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सिंह को राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष बतौर जो कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था, वह भी अब नही रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे नेता विरोधी दल मुलायमसिंह यादव द्वारा विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में बोलते हुए राज्य के कैबिनेट सचिव की असंवैधानिक नियुक्ति का मामला उठाया था, उसी के बारे में स्पष्ट करना है कि अब नए शासनादेश के तहत शशांक राज्य के प्रशासनिक मुखिया नही रहेगें। मुख्य सचिव ही प्रशासनिक मुखिया होंगे।

उल्लेखनीय है कि शशांक विवादों में घिर चुके हैं। उनकी कैबिनेट सचिव के पद पर हुई नियुक्ति के खिलाफ दो जनहित याचिकाएँ इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में लंबित हैं, जिस पर अगली सुनवाई 3 मार्च को निर्धारित है।

इसी के साथ कैबिनेट सचिव का नाम किडनी कांड में भी चल रहा है। अम्बाला की एक अदालत के सामने डॉ. उपेन्द्र ने पहली बार शशांक का नाम लेकर उन्हें मुश्किल में डाल दिया था। प्रमुख विपक्षी दल सपा सहित अन्य विपक्षी दलों ने कैबिनेट सचिव को हटाए जाने की माँग लगातार कर रहे हैं।

दरअसल राज्य के प्रशासनिक अधिकारी कैबिनेट सचिव के पद पर गैर संवर्गीय (गैर आईएएस) की नियुक्ति का अन्दरूनी तौर पर भारी विरोध कर रहे हैं। कैबिनेट सचिव की नियुक्ति के बाद आरोप हैं कि शशांक ने आईएएस रूल्स ऑफ विजनेस में संशोधन कर खुद को राज्य का प्रशासनिक मुखिया बनाए जाने के आदेश जारी करा दिए थे, जिसके तहत मुख्य सचिव से भी अधिक प्रशासनिक ताकत उनके हाथों मे आ गई थी जिसका विरोध आईएएस कर रहे थे।

उच्च न्यायालय में कैबिनेट सचिव पद पर शशांक शेखर सिंह की नियुक्ति को लेकर लम्बित वाद में न्यायमूर्ति कई बार टिप्पणी कर चुके थे कि सरकारी कर्मचारी को मंत्री पद कैसे दिया जा सकता है, तथा क्या गैर संवर्गीय अधिकारी के अधीन मुख्य सचिव कार्य कर सकता है?

इन्हीं सब विवादों से फिलहाल बचने के लिए मुख्यमंत्री मायावती बैकफुट पर आ गईं और उन्होंने सिंह को राज्य के प्रशासनिक मुखिया के पद से हटाकर मुख्य सचिव को पूर्व की भांति प्रशासनिक मुखिया घोषित कर शासनादेश जारी किया।

उधर समाजवादी पार्टी के विधानसभा में उप नेता अम्बिका चौधरी का कहना है कि मुख्यमंत्री मायावती ने शशांक की किडनी कांड में संलिप्तता के कारण उन्हें हटाया है।

उल्लेखनीय है कि वेबदुनिया ने शशांक शेखर सिंह की असंवैधानिक नियुक्ति तथा उनके नोएडा स्थित मकान के किडनी कांड में शामिल होने के समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किए थे।
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