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...अब रैंप पर थिरकेंगी बकरियाँ
मथुरा में एक मार्च से आयोजित होने जा रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय बकरी मेले में उन्नत नस्ल की बकरी स्पर्धा के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से लाई गई विशिष्ट बकरियाँ रैंप पर थिरकती नजर आएँगी।

इस मेले का आयोजन उत्तरप्रदेश में मथुरा जनपद के मखदूम गाँव स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान में किया जा रहा है।

बकरियों के लिए जो रैंप बनाया गया है वह एक विशाल घेरे के समान है। इस घेरे में एक-एक कर करीब छह सौ बकरियाँ अपनी उन्नत नस्ल का प्रदर्शन करेंगी।

किसी सौंदर्य स्पर्धा की प्रतिभागियों के समान ही इन बकरियों को रंग-रूप, पूँछ, थन, बाल, ऊँचाई के आधार पर अंक तालिका में सर्वोच्च स्थान पाने की कोशिश करनी होगी। प्रतियोगिता का निर्णायक मंडल नर एवं मादा बकरियों की शारीरिक संरचना के आधार पर भी अंक देगा।

विशाल घेरेनुमा रैंप के आसपास बैठे निर्णायक नर एवं मादा वर्ग की तीन अलग-अलग प्रजाति की बकरियों का चयन प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान के लिए किया जाएगा। हर प्रजाति की दो बकरियों को सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएँगे।

दिलचस्प बात यह है कि जो बकरी विजेता घोषित की जाएगी उसे अपने स्थान के अनुसार तय रंग के फूलों का ताज पहनाया जाएगा। उसके पालक को प्रमाण-पत्र के अतिरिक्त बकरी पालन में उपयोगी साबित होने वाली सामग्री या वस्तु पुरस्कार स्वरूप दी जाएगी।

स्पर्धा के दौरान संगीत की स्वर लहरियाँ गूँजती रहेंगी। समझा जाता है कि संगीत की स्वर लहरियाँ सुनकर आमतौर पर पशु अधिक दूध देते हैं।

तीन घंटे से अधिक समय तक चलने वाली इस स्पर्धा में केवल एक वर्ष की आयु पूरी कर चुकी वयस्क बकरियाँ ही शामिल की जाएँगी।

इस मेले का उद्देश्य किसानों में बकरी पालन के प्रति रुचि जगाना और वर्तमान में बकरी पालन कर रहे ग्रामीणों का उत्साहवर्धन करना है।

मथुरा स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. नरेंद्रपाल सिंह उत्साहित होकर बताते हैं कि पिछले दिनों जानेमाने अभिनेता राजेश खन्ना ने संस्थान में आकर बकरी पालन व्यवसाय की जानकारी ली।

वे मुंबई, पुणे के मध्य स्थित अपने एक सौ एकड़ के फार्म हाउस पर बड़े पैमाने पर बकरियों का फार्म तैयार कर प्रोडक्शन एवं प्रोसेसिंग के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के पौत्र अक्षयसिंह डेढ़ वर्ष पूर्व बकरी पालन के गुर सीखकर आजकल मांडा के किले में फार्म हाउस चला रहे हैं और आम भारतीय की तरह वास्तविक ग्राम्य जीवन का लुत्फ उठा रहे हैं।
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