इन्दौर में रिश्वत लेते रंगे हाथों धरदबोचा गया आयकर विभाग का एक आला अधिकारी फिलहाल केन्द्रीय अनुसंधान ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में है। वहीं सीबीआई ने भी बड़े खुलासे की उम्मीद के साथ मामले में जाँच को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि सीबीआई की टीम ने 20 फरवरी को आयकर विभाग में बतौर सहायक आयुक्त पदस्थ पंकज गुप्ता के कालिंदी कुंज स्थित घर पर छापा मारा था और नौ लाख रुपए की रिश्वत लेते वक्त गिरफ्तार किया था।
गुप्ता चार्टर्ड एकाउंटेंट एसएस मूंदड़ा के जरिये एक पैकेजिंग इकाई के संचालक से घूस ले रहे थे। मूंदड़ा पर घूस के इस गोरख धंधे में आयकर अधिकारी से मिलीभगत का आरोप है।
गुप्ता और मूदड़ा को कल इंदौर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया। अदालत ने इन्हें सात दिन की सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश जारी कर दिया। मामले में अगली सुनवाई पाँच मार्च को होगी।
सीबीआई के वकील हेमंत शुक्ला ने संवाददाताओं को बताया कि गुप्ता ने हाल में एडवांस रोटोफ्लैक्स इंडस्ट्रीज नामक पैकेजिंग इकाई का सर्वेक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने इकाई पर 65 लाख रुपए का आयकर बकाया होने की बात कही थी। शुक्ला के मुताबिक आयकर विभाग के इस अफसर ने इकाई के संचालक अभय अग्रवाल से कर चोरी के कथित मामले को दबाने के लिए नौ लाख रुपए की रिश्वत माँगी थी। साथ ही उन्हें धमकाते हुए कहा कि अगर जल्द ही यह रकम नहीं दी गई तो सरकारी रिकार्ड में इकाई के नाम डेढ़ करोड़ रुपए की राशि आयकर बकाया के रूप में दर्ज हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि अग्रवाल ने उस वक्त तो घूस के लिए हामी भर दी मगर चुपके से सीबीआई को इसकी शिकायत भी कर दी। सीबीआई ने जाल बिछाया और इसमें गुप्ता व मूंदड़ा फँस गए। सीबीआई छापे की कार्रवाई 26 फरवरी को देर रात तक चली। इस दौरान नकदी के साथ कई दस्तावेज भी बरामद किए गए। शुक्ला ने कहा कि गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जाँच जारी है और उनके खिलाफ आय के ज्ञात स्त्रोतों से ज्यादा संपत्ति रखने का मामला भी दर्ज हो सकता है।
इस बीच सीबीआई के एक आला अधिकारी ने नाम जाहिर न किए जाने की शर्त पर कहा कि हमने छापों के दौरान कई दस्तावेज बरामद किए हैं और हम उनकी बारीकी से जाँच कर रहे हैं। छापे की कार्रवाई गुप्ता के पैतृक आवास पर भी की गई जो ग्वालियर जिले के डबरा में स्थित है।
अधिकारी ने कहा कि गुप्ता का एक मोबाइल फोन गायब है और उन्हें उम्मीद है कि इसकी कॉल डीटेल से इस घूस गिरोह में शामिल नए नामों का खुलासा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में आयकर विभाग का एक अन्य अधिकारी अजय वीरे भी संदिग्ध है। वह फिलहाल फरार है और उसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
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